पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में रंजिश, जमीन विवाद या पारिवारिक तनाव के चलते आरोपों को गंभीर रूप दिया जाता है। मारपीट की साधारण घटनाओं को लूट या रंगदारी में बदलकर पेश किया जाता है, ताकि विपक्षी पक्ष पर दबाव बनाया जा सके। विवेचना के दौरान जब साक्ष्य जुटाए जाते हैं, तो इन आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाती। घरेलू कलह से जुड़े मामलों में भी बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हो रही हैं। एक वर्ष में 800 शिकायतें ऐसी आईं, जिनमें दहेज उत्पीड़न या पारिवारिक हिंसा व अवैध संबंध का आरोप लगाया गया।
हालांकि, काउंसिलिंग के बाद शिकायतकर्ताओं ने आरोप वापस ले लिए। जांच में सामने आया कि कई मामलों में गुस्से या आवेश में शिकायत दर्ज कराई गई। जिसे बाद में सुलह के बाद खत्म कर दिया जाता है।
जांच और काउंसिलिंग के बाद सामने आया कि मामलों में बड़ी संख्या रंजिश या पारिवारिक विवाद से प्रेरित थी। ऐसे मामलों में साक्ष्य के आधार पर सख्ती से कार्रवाई करने की दिशा में काम कर रही है। काउंसिलिंग की भूमिका भी अहम साबित हो रही है, जिससे कई पारिवारिक विवाद अदालत तक पहुंचने से पहले ही सुलझ जा रहे हैं।
महिला अपराध मामलों को गंभीरता से लिया जाता है। निष्पक्ष व गुणवत्तापूर्ण विवेचना कराई जा रही है। बहुत से ऐसे मामले हैं जिसमें दहेज उत्पीड़न, मारपीट या हिंसा या छेड़खानी के आते हैं जो जांच के बाद गलत साबित होते हैं। ऐसे में दोनों पक्षों को बुलाकर काउंसिलिंग कराकर मामला समाप्त कराया गया। - नमृता श्रीवास्तव, एडीसीपी महिला अपराध