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वाराणसी नगर निकाय चुनाव में लागू होगा 'एमसीडी फॉर्मूला',कई चेहरों की हवाइयां उड़ी

Thu, 04 May 2017 12:28 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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BJP
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हाल में दिल्‍ली एमसीडी चुनावों में मिले प्रचंड जीत के बाद भाजपा वाराणसी नगर निकाय चुनाव की तैयारी में जुट गई है। इसे लेकर भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक लखनऊ में हुई। पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस दौरान वाराणसी नगर निकाय  के चुनाव दिल्ली एमसीडी की तर्ज पर लड़ने पर विचार-विमर्श किया गया।
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 कहा गया कि जिस प्रकार वहां पुराने पार्षदों के टिकट काट कर नए चेहरों पर दांव लगाया था, उसी तरह यहां भी पुराने पार्षदों का टिकट काटा जाएगा और नए चेहरों पर पार्टी दांव लगाएगी। इस खबर से वर्तमान पार्षदों के अंदर बेचैनी बढ़ गई। दिल्ली में भी कुछ इसी तरह के हालात थे मगर विरोध के सुर तेज नहीं हुए।

भाजपा वहां पुराने पार्षदों को मैनेज करने में सफल रही। सूत्रों के मुताबिक, वाराणसी में अगर दिल्ली मॉडल अपनाया गया तो विरोध होगा। फिलहाल पुराने पार्षदों के माथे पर लकीरे खिंच गई है। बता दें कि हाल ही में संपन्न विधान चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर वाराणसी में रोष ‌देखा गया था। हालांकि भाजपा को यहां रिकॉर्ड तोड़ सफलता ‌म‌िली।
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 वाराणसी नगर निगम चुनाव में केंद्र सरकार की योजनाओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की तैयारी है। 
दरअसल, पार्टी मान रही है कि वाराणसी नगर निगम में सपा के मुकाबले पहले से ही कमजोर भाजपा के मौजूदा पार्षद अपने दम पर करिश्मा नहीं कर पाएंगे।
 
उल्टे पार्टी को उनकी निष्क्रियता का नुकसान उठाना पडे़गा। पार्टी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मिली शानदार जीत को बरकरार रखने के लिए ऐसा जोखिम उठाने के लिए तैयार नहीं है। इसलिए सोचा जा रहा है कि ज्यादातर वार्डों में नए प्रत्याशी मैदान में उतारे जाएं, क्योंकि लोगों को उनसे उम्मीदें ही ज्यादा होंगी।
 
हालांकि पुराने पार्षदों का टिकट काटे जाने पर पार्टी को विधानसभा चुनाव की तरह विरोध झेलना पड़ेगा। इसके मद्देनजर रखकर पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।

एससी महिला के लिए रिजर्व होगा मेयर पद!

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नगर निगम चुनाव के लिहाज से पार्टी की नजर मेयर पद के आरक्षण पर है। संभावना है कि वाराणसी का मेयर पद एससी महिला के लिए आरक्षित हो सकता है। विधानसभा चुनाव में जिन लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थी, उन्हीं में से किसी को पार्टी मेयर पद के लिए मैदान में उतार सकती है।

यही नहीं, ओबीसी आरक्षण के लिए चल रहे रैपिड सर्वे के नतीजों के आधार पर कुछ क्षेत्रों में फेरबदल को देखते हुए जातिगत आधार पर भी टिकट दी जा सकती है। महानगर इकाई से इसकी रिपोर्ट बनाने को कहा गया है। महानगर इकाई की रिपोर्ट के अलावा जिताऊ उम्मीदवारों के चयन के लिए पार्टी किसी एजेंसी से भी सर्वे कराएगी।

वैसे जानकारों के अनुसार प्रदेश के नगर निगमों में जनसंख्या के हिसाब से मेयर सीट के लिए आरक्षण होता है। सबसे पहले एससी महिला सीट आरक्षित होगी। यदि 2012 में सीट एससी महिला आरक्षित थी तो 2017 में इसे रिपीट नहीं किया जाएगा।

इसके बाद दूसरे नंबर पर एससी, तीसरे पर पिछडे़ वर्ग की महिला, चौथे नंबर पर बीसी, पांचवें नंबर पर सामान्य महिला, छठवें नंबर पर सामान्य और बाकी सभी सीटों को अनारक्षित कर दिया जाता है।
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जून के अंतिम सप्ताह में जारी हो सकती है अधिसूचना

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नगर निकाय की अधिसूचना जून के अंतिम सप्ताह में जारी हो सकती है। इसकी तैयारियां निर्वाचन आयोग कर रहा है। राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान अफसरों से पांच मई तक आरक्षण की स्थिति को अंतिम रूप देकर आयोग और शासन को भेजने का निर्देश दिया। नगर निगम की ओर से परिसीमन की रिपोर्ट भेज दी गई है। जल्द ही आयोग इसे अंतिम रूप देकर सूची जारी कर सकता है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान डीएम योगेश्वर राम मिश्रा, सहायक निर्वाचन अधिकारी नगर निकाय एवं नगर पंचायत आरआर वर्मा आदि मौजूद थे। 
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