हाल में दिल्ली एमसीडी चुनावों में मिले प्रचंड जीत के बाद भाजपा वाराणसी नगर निकाय चुनाव की तैयारी में जुट गई है। इसे लेकर भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक लखनऊ में हुई। पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस दौरान वाराणसी नगर निकाय के चुनाव दिल्ली एमसीडी की तर्ज पर लड़ने पर विचार-विमर्श किया गया।
कहा गया कि जिस प्रकार वहां पुराने पार्षदों के टिकट काट कर नए चेहरों पर दांव लगाया था, उसी तरह यहां भी पुराने पार्षदों का टिकट काटा जाएगा और नए चेहरों पर पार्टी दांव लगाएगी। इस खबर से वर्तमान पार्षदों के अंदर बेचैनी बढ़ गई। दिल्ली में भी कुछ इसी तरह के हालात थे मगर विरोध के सुर तेज नहीं हुए।
भाजपा वहां पुराने पार्षदों को मैनेज करने में सफल रही। सूत्रों के मुताबिक, वाराणसी में अगर दिल्ली मॉडल अपनाया गया तो विरोध होगा। फिलहाल पुराने पार्षदों के माथे पर लकीरे खिंच गई है। बता दें कि हाल ही में संपन्न विधान चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर वाराणसी में रोष देखा गया था। हालांकि भाजपा को यहां रिकॉर्ड तोड़ सफलता मिली।
वाराणसी नगर निगम चुनाव में केंद्र सरकार की योजनाओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की तैयारी है।
दरअसल, पार्टी मान रही है कि वाराणसी नगर निगम में सपा के मुकाबले पहले से ही कमजोर भाजपा के मौजूदा पार्षद अपने दम पर करिश्मा नहीं कर पाएंगे।
उल्टे पार्टी को उनकी निष्क्रियता का नुकसान उठाना पडे़गा। पार्टी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मिली शानदार जीत को बरकरार रखने के लिए ऐसा जोखिम उठाने के लिए तैयार नहीं है। इसलिए सोचा जा रहा है कि ज्यादातर वार्डों में नए प्रत्याशी मैदान में उतारे जाएं, क्योंकि लोगों को उनसे उम्मीदें ही ज्यादा होंगी।
हालांकि पुराने पार्षदों का टिकट काटे जाने पर पार्टी को विधानसभा चुनाव की तरह विरोध झेलना पड़ेगा। इसके मद्देनजर रखकर पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।