इन विकास परियोजनाओं के साथ ही नगर निगम सीमा में शामिल होने के बाद यहां बसने वालों की सुविधाएं भी काशी के समान होगी। यह सब मिला कर अब वाराणसी नगर निगम की सीमा चंदौली तक पहुंच जाएगी। इसके साथ ही महानगर की परिकल्पना वाले काशी के विस्तार का रास्ता भी साफ होगा।
वाराणसी नगर निगम में शामिल किए जाने के बाद जरूरत के आधार पर विकास योजनाएं लाई जा सकेंगी। नगर निगम में शामिल होने के बाद रामनगर और सूजाबाद में नागरिक सुविधाओं का प्रबंधन बेहतर होने के साथ ही नगर निगम की आय में वृद्धि होगी। इससे क्षेत्र के विकास के लिए निगम के व्यय संबंधी दायित्व निर्वहन में आसानी होगी। क्षेत्र के अवस्थापना विकास के होने से स्थानीय निवासियों हेतु अतिरिक्त रोजगार सृजन की संभावना है।
प्रस्ताव के मुताबिक सीमा विस्तार के बाद वाराणसी नगर निगम का दायरा बढ़ाकर 18256.017 हेक्टेयर और आबादी 1636659 हो गई है। मौजूदा समय वाराणसी नगर निगम का क्षेत्रफल 16716.617 हेक्टेयर और वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जनसंख्या 1567219 है। नगर निगम में विलय होने वाले नगर पंचायत सूजाबाद का क्षेत्रफल 1177 हेक्टेयर और आबादी 20308 है। जबकि नगर पालिका परिषद रामनगर का क्षेत्रफल 362.40 हेक्टेयर और आबादी 49132 है।
शहर के विस्तार के लिए नई काशी बसाने में जुटे विकास प्राधिकरण के प्रस्तावित टाउनशिप के प्रस्ताव को भी नगर निगम सीमा के विस्तार से गति मिलेगी। वीडीए ने रामनगर से सटे सरेसर और अलीनगर में साढ़े तीन सौ एकड़ जमीन लैंड पूलिंग के जरिए विकसित करने वाली है। नगर निगम की सीमा विस्तार के बाद यहां बसने वालों का भी इस क्षेत्र में बसने का रूझान बढ़ेगा।
पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की जन्मस्थली रामनगर की नगर पालिका परिषद का गठन आजादी के बाद 11 नवंबर 1950 को किया गया था। वाराणसी कैंट विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा रहे रामनगर नगर पालिका के चेयरमैन पद पर पिछले डेढ दशक से कांग्रेस का कब्जा है।