न्नपूर्णा मंदिर के महंत ने बताया कि अन्नक्षेत्र का निर्माण 1998 में कराया गया था। बीम और पिलर पर पूरा भवन निर्मित है। वहीं, अन्नपूर्णा मंदिर तो प्राचीन है लेकिन 1990 में उसकी मरम्मत कराई गई थी। इस दौरान उसमें डेढ फीट की बीम और दो बाई ढाई फीट का पिलर भी लगवाया गया है।
मठ, मंदिर और अन्नक्षेत्र की किसी भी दीवार में एक दरार तक नहीं है। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि बिना किसी जांच और सर्वे के नगर निगम ने किस आधार पर नोटिस जारी कर दिया है। इस मामले में उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी।
मठ के बंधक काशी मिश्रा ने कहा कि बिना किसी सर्वे के ही नोटिस जारी कर दिया गया है। यह नगर निगम की कार्यशैली पर सवालिया निशान है। महंत के मुताबिक मठ मंदिर तो अभी बेहतर स्थिति में है और नगर निगम की ओर से नोटिस जारी कर दिया गया। वहीं हमारे दो भवन पूरी तरह से जर्जर हैं लेकिन आज तक नगर निगम ने कोई नोटिस नहीं भेजा है।
उन्होंने बताया कि मकान नंबर डी 9/1 के बगल वाला भवन और विश्वनाथ गली में मकान नंबर 11/21 पूरी तरह से जर्जर है। यह दोनों भवन अन्नपूर्णा मंदिर की ही संपत्ति है। दशाश्वमेध जोन के अवर अभियंता दिनेश प्रसाद ने बताया कि नोटिस भेजा गया था लेकिन बाद में भवन की स्थिति बेहतर होने के कारण नोटिस को हटवा दिया गया है।