अरुण पाठक ने दावा किया कि उन्होंने विरोध दर्ज कराने के लिए सल्फास खा लिया था और पीठ पर पत्थर बांधकर गंगा में जलसमाधि लेने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा कि उस समय देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे। उनके अनुसार फिल्म वाटर भारतीय संस्कृति और परंपराओं के खिलाफ थी, इसलिए उसका विरोध किया गया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे महत्वपूर्ण होती है और सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे देश से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जागरूक रहें और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार से जवाब मांगें। उनका कहना था कि यदि युवा संगठित होकर संवैधानिक दायरे में अपनी बात रखते हैं तो बड़े से बड़ा निर्णय भी बदल सकता है। उन्होंने युवाओं से सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने तथा जनहित के सवालों को मजबूती से उठाने का आह्वान किया।