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Varanasi News: मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया, बैलेट पेपर से चुनाव कराने की उठाई मांग; की अपील

Sun, 26 Jul 2026 12:27 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: विश्व हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण पाठक ने केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया। उन्होंने भ्रष्टाचारियों को मौका न देने और ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। साथ ही वर्ष 2000 में फिल्म वाटर के विरोध और अपने आंदोलन का जिक्र करते हुए युवाओं से जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाने की अपील की।
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हिंदूवादी नेता अरुण पाठक। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विश्व हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अखिल भारत हिन्दू महासभा (युवा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण पाठक ने केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताते हुए कहा कि भाजपा के शासनकाल में पहली बार किसी बड़े मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इससे सत्ता में बैठे नेताओं के बीच जवाबदेही और भय का माहौल बनेगा, लेकिन केवल इस्तीफे से काम नहीं चलेगा।

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अरुण पाठक ने कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़े लोगों को दोबारा अवसर नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने चुनाव व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देश में एक बार फिर बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने चाहिए। उनके अनुसार ईवीएम के बजाय पारंपरिक मतपत्र प्रणाली लोकतंत्र के लिए अधिक भरोसेमंद होगी।
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उन्होंने अपने पुराने आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि 5 फरवरी 2000 को वाराणसी के तुलसी घाट पर फिल्म वाटर के विरोध में उन्होंने आंदोलन किया था। उस समय अस्सी चौराहे पर भारी पुलिस बल तैनात था और विभिन्न संगठनों के साथ भाजपा कार्यकर्ता भी फिल्म का विरोध कर रहे थे। इसके बावजूद जब विरोध का असर नहीं हुआ तो उन्होंने आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया।

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अरुण पाठक ने दावा किया कि उन्होंने विरोध दर्ज कराने के लिए सल्फास खा लिया था और पीठ पर पत्थर बांधकर गंगा में जलसमाधि लेने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा कि उस समय देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे। उनके अनुसार फिल्म वाटर भारतीय संस्कृति और परंपराओं के खिलाफ थी, इसलिए उसका विरोध किया गया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे महत्वपूर्ण होती है और सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे देश से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जागरूक रहें और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार से जवाब मांगें। उनका कहना था कि यदि युवा संगठित होकर संवैधानिक दायरे में अपनी बात रखते हैं तो बड़े से बड़ा निर्णय भी बदल सकता है। उन्होंने युवाओं से सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने तथा जनहित के सवालों को मजबूती से उठाने का आह्वान किया।
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