होली के रंग में बाजार रंगे नजर आ रहे हैं। दूकानों पर सजाई गई रंग बिरंगी पिचकारियां न केवल बच्चों को बल्कि बड़ों को अपनी ओर खींच रही है। इस बार जहां प्रेशरचालित पिचकारियों की मांग ज्यादा नजर आ रही है तो वहीं परंपरागत पिचकारियां भी दूकानदारों ने सजाई हैं।
पूर्वांचल की सबसे बड़ी खिलौना मंडी हड़हा सराय में पिचकारियों की खेप पर खेप पहुंच रही है। वहीं विभिन्न जिलों से पहुंच रहे खरीदार इसको थोक में खरीद रहे हैं। इस बार प्रेशर वाली पिचकारियों की जबरदस्त मांग है।
50 से 800 रुपये तक वाली यह पिचकारियों की रंग भरने की क्षमता ज्यादा होती है तो मेहनत भी कम लगती है। वहीं परंपरागत पिचकारियां भी नए कलेवर के साथ पेश की गई हैं। इनका रेंज 20 से लेकर 150 रुपये तक है।
इस बार परंपरागत पिचकारियों को मिक्स कलर के साथ सजाया गया है। वहीं बच्चों को डोरेमान, मोटू-पतलू, ऑगी एंड काक्रोचेज वाली पिचकारियां खूब रास आ रही है। बंदूक और कार्टून कैरेक्टर के आकार वाली पिचकारियां भी खूब पसंद की जा रही है।
होली में कुछ अलग दिखने के साथ ही चेहरे को रंग से बचाने के लिए अलग-अलग मुखौटे भी इस्तेमाल किए जाते हैं। इसके लिए बाजार तैयार है। भूत, राक्षस से दिखने वाले मुखौटे बाजार में उतारे गए हैं। कुछ मुखौटे तो नकली बाल के साथ हैं।