आजादी के बाद पीएम मोदी ने उस रिकॉर्ड की बराबरी की है, जब काशी से लगातार तीसरी बार सांसद बने। इससे पहले कांग्रेस के रघुनाथ सिंह और भाजपा के शंकर प्रसाद जायसवाल का लगातार तीन बार वाराणसी सांसद का रिकॉर्ड था। वाराणसी सीट पर पीएम मोदी से पहले भाजपा के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी का कब्जा था। 2014 में भाजपा ने प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी को वाराणसी सीट से उतारकर देश भर में हिन्दुत्व के मसले को साधा था। तब आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने वाराणसी सीट से चुनाव लड़ा था। मोदी ने 3 लाख से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी। केजरीवाल 2 लाख वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे।
पीएम मोदी के अलावा जो छह लोग आम चुनाव मैदान में थे उनमें सबसे बड़ा नाम था अजय राय का। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और पांच बार के विधायक हैं। उनके बाद नाम आता है बसपा के अतहर जमाल लारी का। बुनकरों के नेता हैं, कई चुनाव लड़ चुके हैं। फिर अपना दल कमेरावादी के गगन प्रकाश यादव का नाम आता है। वो पीडीएम के प्रत्याशी हैं और उनकी पार्टी पटेलों में दबदबा रखती है। युग तुलसी पार्टी के कोली शेट्टी दक्षिण भारत से हैं। काशी में दक्षिण भारतीयों की ठीक ठाक आबादी है। दो निर्दलीय प्रत्याशी संजय कुमार तिवारी और दिनेश यादव हैं। तिवारी सीए हैं और सोशल वर्कर हैं। यादव तीन बार के पार्षद। एक तरफ कमल और दूसरी तरफ मुकाबले में हाथ, हाथी, लिफाफा, रोड रोलर, बांसुरी और डंबल रहा।