वाराणसी के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाले भोजन, नाश्ते पर संकट आ गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बजट न मिलने के कारण भोजन और नाश्ता आपूर्ति करने वाली एजेंसी के करीब 33 लाख रुपये बकाए का भुगतान नहीं हो पा रहा है। अगर जल्द ही बजट नहीं मिला तो हालात गंभीर हो सकते हैं।
अस्पतालों में भर्ती मरीजों को सुबह नाश्ता और दिन में दो समय भोजन देने का प्रावधान है। बनारस में मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, जिला महिला अस्पताल, दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल, रामनगर अस्पताल में हर दिन करीब 500 मरीजों में इसका वितरण कराया जाता है।
इसके तहत मरीजों को नाश्ते में दूध, ब्रेड, अंडा और फल दिया जाता है वहीं भोजन में रोटी, चावल, दाल और सब्जी मिलती है। इस पर हर माह करीब 11 लाख रुपये का खर्च आता है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिस एजेंसी को यह जिम्मेदारी दी गई हैं, उसका अप्रैल से जून माह तक का भुगतान नहीं हुआ है। अस्पताल से जुड़े अधिकारियों ने शासन से बजट की मांग के लिए पत्र भी लिखा लेकिन कुछ नहीं हुआ।
मंडलीय अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. बीएन श्रीवास्तव, दीनदयाल अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके उपाध्याय ने बताया कि जैसे ही बजट आएगा, एजेंसी को भुगतान कर दिया जाएगा।
‘साहब, बाहर की दवा लिख रहे डॉक्टर’
बीएचयू अस्पताल
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बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में बाहर की दवा लिखने से डॉक्टर बाज नहीं आ रहे। इससे जुड़ी शिकायतें चिकित्सा अधीक्षक के यहां पहुंच रही हैं। सोमवार को भी आजमगढ़ की एक गरीब महिला ने शिकायत की।
कार्डियोलॉजी विभाग के एक असिस्टेंट प्रोफेसर पर बाहर के एक मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर लाने के लिए पर्चा देने का आरोप लगाया। जबकि महिला के इलाज के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय से पैसा बीएचयू प्रशासन को जारी किया गया है।
आजमगढ़ के हडौरा निवासी संतोष यादव की पत्नी सरिता का वाल्व खराब हो गया था। पांच साल पहले उसने विभाग के एक वरिष्ठ प्रोफेसर से इलाज कराया था। अब उसका वाल्व सिकुड़ने लगा तो असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार को दिखाया। उनकी देखरेख में इलाज चल रहा है और वाल्व बदला जाना है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय से मिलने उनके कार्यालय में पहुंची सरिता ने बताया कि इलाज के लिए उसे प्रधानमंत्री कार्यालय से 50 हजार, मुख्यमंत्री कार्यालय से एक लाख रुपये स्वीकृत हुए। दवा अमृत फार्मेसी से खरीदी जानी है, इसका आदेश अप्रैल में जारी हो चुका है।
महिला ने आरोप लगाया है कि चिकित्सक पूर्व में इलाज के दौरान मौतों का हवाला देते हुए बाहर से दवा खरीदने की बात कह रहे हैं। चिकित्सा अधीक्षक ने उसे हर हाल में अमृत फार्मेसी से दवा दिलाने का आश्वासन दिया, तब वह लौटी।
उधर, डॉक्टर संजय कुमार ने आरोप को निराधार बताया। कहा कि किसी भी मरीज को बाहर से दवा खरीदने के लिए नहीं कहा जाता।