चेतावनी बिंदु पार होने के बाद नदी किनारे और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ जाएगा। इसके साथ ही घाटों के डूबने और लोगों के जनजीवन के प्रभावित होने की आशंका रहेगी। केंद्रीय जल आयोग का कहना है कि सात दिन का पूर्वानुमान मौसम की स्थिति और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाले पानी के आधार पर बदल सकता है।
आयोग के पूर्वानुमान के अनुसार गंगा के जलस्तर में तत्काल बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। यदि पानी चेतावनी बिंदु के आसपास या उससे ऊपर बना रहता है तो नदी किनारे बसे इलाकों पर लगातार दबाव बना रहेगा।
हालांकि, बीते तीन दिनों से जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। शनिवार को पिछले 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में 52 सेंटीमीटर की गिरावट आई। शनिवार रात 8:50 बजे तक जलस्तर 70.04 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी बिंदु से 22 सेंटीमीटर नीचे था।
जलस्तर में मौजूदा गिरावट के बावजूद अगले सप्ताह संभावित बढ़ोतरी ने नदी किनारे रहने वाले लोगों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। लोगों को जलस्तर पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।