दशाश्वमेध घाट, गंगा आरती
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बाढ़ में भी नहीं टूटी आरती की परंपरा
काशी की गंगा आरती धार्मिक अनुष्ठान के साथ सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और जनआस्था का प्रतीक है। इसमें शामिल होने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन दशाश्वमेध घाट पहुंचते हैं। बाढ़ की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी गंगोत्री सेवा समिति ने वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से आरती की परंपरा जारी रखी।
अब आरती के पारंपरिक स्थल पर लौटने से श्रद्धालुओं और काशीवासियों में उत्साह है। यह वापसी मां गंगा के प्रति आस्था और काशी की सांस्कृतिक विरासत की निरंतरता का प्रतीक मानी जा रही है।