आने वाले समय में वाराणसी ट्रांसपोर्टेशन का हब बनेगा। गंगा में जल परिवहन की योजना के साथ ही इसे मूर्तरूप देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पीएम के संसदीय क्षेत्र में देश का पहला ‘फ्रेट विलेज’ बनने जा रहा है। इसके लिए 7000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मंगलवार को यहां आईं भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण की अध्यक्ष नूतन गुहा विश्वास ने कहा कि ‘फ्रेट विलेज’ के लिए जमीन की तलाश शुरू कर दी गई है। ‘फ्रेट विलेज’ की जल, रेलवे और सड़क परिवहन तीनों से जुड़ा होगा। रामनगर में जल परिवहन के लिए निर्माणाधीन मल्टी मॉडल टर्मिनल से इसकी सीधी कनेक्टिविटी होगी।
मल्टी मॉडल टर्मिनल का जायजा लेने के बाद अध्यक्ष नूतन गुहा राजघाट भी गईं। वहां आकर ठहरे क्रूज ‘राजमहल’ के आगमन की जानकारी की। गंगा आरती देखी। बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया।
कैंटोनमेंट स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि रामनगर में निर्माणाधीन टर्मिनल 2019 तक तैयार हो जाएगा। इसके बाद गंगा में बड़े जहाज चलने लगेंगे। साथ ही गंगा में ड्रेजिंग पर 1500-2000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। जहाज के संचालन के लिए गंगा में कम से कम 2.5 मीटर की गहराई होनी चाहिए।
बताया कि गाजीपुर और कालूघाट (पटना) में इंटर मॉडल टर्मिनल बनेगा। सभी टर्मिनल से रेल और सड़क मार्ग जुड़े रहेंगे। वाराणसी से हल्दिया तक जल परिवहन की योजना पर विश्वबैंक के सहयोग से 5400 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।
टर्मिनल तैयार होने से पहले गंगा में छोटे मालवाहक जहाज चलेंगे। ‘फ्रेट विलेज’ 100 एकड़ में बनाया जाएगा। यहां इंडस्ट्री, हाउसिंग, कस्टम, पैकिंग से ट्रांसपोर्टेशन तक सभी सुविधाएं होंगी। बाहर से आने वाले कच्चे-पक्के माल को अलग-अलग पैकिंग कर उसे हल्दिया तक जलमार्ग के रास्ते भेजा जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि ‘फ्रेट विलेज’ के प्रस्ताव को अभी कैबिनेट कमेटी का एप्रूवल बाकी है। एप्रूवल मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।