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वाराणसी फोरेंसिक लैब में अब होगी डीएनए की जांच, पूर्वांचल के 29 जिलों को होगी सहूलियत

Sun, 17 Dec 2017 02:45 PM IST
amarujala.com, written by पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी
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डीएनए जांच का काम शुरू होने के बाद नमूना नहीं भेजना होगा लखनऊ - फोटो : self
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वाराणसी के रामनगर स्थित फोरेंसिक लैब में आगामी छह महीने में डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड (डीएनए) की जांच शुरू हो जाएगी। फोरेंसिक लैब में डीएनए यूनिट की स्थापना के लिए प्रदेश सरकार ने नौ करोड़ 86 लाख सात हजार पांच सौ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है।
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प्रदेश के गृह अनुभाग के संयुक्त सचिव एसपी उपाध्याय की ओर से इस बारे में पत्र जारी कर दिया गया है। फोरेंसिक लैब में डीएनए जांच के शुरू होने के बाद वाराणसी, गोरखपुर और इलाहाबाद जोन के 29 जिलों के लिए बड़ी सहूलियत होगी।

अब तक इन जिलों से डीएनए जांच के सैंपल लखनऊ भेजे जाते हैं। लखनऊ में पूरे प्रदेश का इकलौता डीएनए जांच केंद्र होने के नाते दबाव अधिक होता है और जांच में देरी होती है।
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रामनगर में पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत बनाई गई अत्याधुनिक फोरेंसिक लैब में फिलहाल बायोलॉजी सेक्शन (मांस, बाल आदि की जांच), सिरोलॉजी सेक्शन, डॉक्यूमेंट सेक्शन, फिजिक्स सेक्शन (इंजन और चेसिस नंबर की जांच), केमिस्ट्री सेक्शन (मादक और ज्वलनशील पदार्थों की जांच) के साथ ही टाक्सिकोलॉजी सेक्शन (विष अनुभाग) कार्यरत हैं।

लैब के प्रभारी संयुक्त निदेशक डॉ. आलोक शुक्ला ने बताया कि आगामी मार्च महीने तक रामनगर में बैलेस्टिक सेक्शन (फायर आर्म्स की जांच) भी स्थापित हो जाएगा। डीएनए यूनिट की स्थापना के लिए हमारे पास बिल्डिंग है।

शासन से स्वीकृत धनराशि के मिलते ही उपकरणोें की खरीद, टेंडर, किट-केमिकल की व्यवस्था सहित अन्य प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी और उसके बाद डीएनए जांच यहां शुरू हो जाएगी। आगरा में भी ऐसी ही यूनिट स्थापित की जा रही है। इससे लखनऊ पर निर्भरता कम होगी और रिपोर्ट आने में समय नहीं लगेगा।
 
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लावारिस शव की शिनाख्त होगी आसान

deadbody
वाराणसी जोन के 10 जिलों में प्रत्येक माह औसतन 40 से 50 अज्ञात शव मिलते हैं। शिनाख्त न होने पर पुलिस अंतिम संस्कार करा देती है। डीएनए यूनिट की स्थापना के बाद उनकी जांच कराकर रिपोर्ट को सुरक्षित रखा जा सकेगा। परिवारीजन दावा करेंगे तो डीएनए मिलान कर शव की पहचान की जा सकेगी।

डीएनए टेस्ट की प्रक्रिया
जिस शख्स की डीएनए जांच करवानी होती है उसके बाल, खून, त्वचा और उल्व तरल (एम्नियोटिक फ्लुइड) का सैंपल लिया जाता है। एम्नियोटिक फ्लुइड गर्भावस्था में भ्रूण के चारों ओर मौजूद तरल होता है। इसके अलावा संबंधित शख्स के गालों के अंदरूनी हिस्से से ब्रश या रूई के जितना नमूना लिया जाता है।

माउथ वॉश के जरिये भी मुंह के अंदर के सेल जमा किए जा सकते हैं। वर्तमान में 1200 तरह के डीएनए टेस्ट मौजूद हैं। डीएनए टेस्ट की मदद से आपका किसी शख्स से रक्त संबंध के बारे में पता चलता है।

डीएनए टेस्ट की मदद से अब नवजात बच्चों में मौजूद किसी बीमारी का पता भी लगाया जाता है। डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट आने में 15 दिन का समय लगता है।
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