वाराणसी के रामनगर स्थित फोरेंसिक लैब में आगामी छह महीने में डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड (डीएनए) की जांच शुरू हो जाएगी। फोरेंसिक लैब में डीएनए यूनिट की स्थापना के लिए प्रदेश सरकार ने नौ करोड़ 86 लाख सात हजार पांच सौ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है।
प्रदेश के गृह अनुभाग के संयुक्त सचिव एसपी उपाध्याय की ओर से इस बारे में पत्र जारी कर दिया गया है। फोरेंसिक लैब में डीएनए जांच के शुरू होने के बाद वाराणसी, गोरखपुर और इलाहाबाद जोन के 29 जिलों के लिए बड़ी सहूलियत होगी।
अब तक इन जिलों से डीएनए जांच के सैंपल लखनऊ भेजे जाते हैं। लखनऊ में पूरे प्रदेश का इकलौता डीएनए जांच केंद्र होने के नाते दबाव अधिक होता है और जांच में देरी होती है।
रामनगर में पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत बनाई गई अत्याधुनिक फोरेंसिक लैब में फिलहाल बायोलॉजी सेक्शन (मांस, बाल आदि की जांच), सिरोलॉजी सेक्शन, डॉक्यूमेंट सेक्शन, फिजिक्स सेक्शन (इंजन और चेसिस नंबर की जांच), केमिस्ट्री सेक्शन (मादक और ज्वलनशील पदार्थों की जांच) के साथ ही टाक्सिकोलॉजी सेक्शन (विष अनुभाग) कार्यरत हैं।
लैब के प्रभारी संयुक्त निदेशक डॉ. आलोक शुक्ला ने बताया कि आगामी मार्च महीने तक रामनगर में बैलेस्टिक सेक्शन (फायर आर्म्स की जांच) भी स्थापित हो जाएगा। डीएनए यूनिट की स्थापना के लिए हमारे पास बिल्डिंग है।
शासन से स्वीकृत धनराशि के मिलते ही उपकरणोें की खरीद, टेंडर, किट-केमिकल की व्यवस्था सहित अन्य प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी और उसके बाद डीएनए जांच यहां शुरू हो जाएगी। आगरा में भी ऐसी ही यूनिट स्थापित की जा रही है। इससे लखनऊ पर निर्भरता कम होगी और रिपोर्ट आने में समय नहीं लगेगा।