सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज में स्थापित चिंतामणि वाटिका छात्रों को अध्यात्म, विज्ञान और संस्कृति से जोड़ेगी। वाटिका में वनस्पति विज्ञान के छात्रों के लिए प्रयोगशाला होगी साथ ही अन्य छात्रों के लिए भारतीय संस्कार से जोड़ने का माध्यम भी बनेगी। विद्यालय परिसर से शुरू हुई यह पहल प्रदेश भर के विद्यालयों के लिए नजीर भी बनेगी।
चिंतामणि वाटिका में फलदार, फूलदार, छायादार, सजावटी, औषधीय पौधों के अलावा नवग्रह वाटिका हर किसी के आकर्षण का केंद्र बनेगी। विद्यालय परिसर में ग्रीन गंगा इको मूवमेंट सोसायटी के सहयोग से वनस्पति वाटिका की शुरुआत की गई है। प्रधानाचार्य डॉ. विश्वनाथ दुबे ने बताया कि शहर के विद्यालयों में यह पहली वाटिका है जो पूरी तरह से छात्रों द्वारा छात्रों के लिए तैयार हो रही है। भारतीय संस्कृति में वृक्षों की पूजा होती है और वनस्पति वाटिका में भी ऐसे पौधे लगाए जा रहे हैं जो पूजन के साथ ही औषधीय इस्तेमाल में लाए जा सकेंगे। वनस्पति विज्ञान के छात्रों के लिए यहां पर प्रैक्टिकल की सुविधा होगी तो वहीं अन्य छात्रों को पौधों के आध्यात्मिक व पर्यावरणीय इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी जाएगी। सोसायटी के सचिव व चिकित्सक डॉ. आरके भाटिया के सहयोग से वाटिका को विद्यालय परिसर में शुरू किया गया है।
लुप्त हो चुके पौधों को मिलेगी जगह
सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज के प्रांगण में स्थापित वनस्पति में लुप्त हो रहे औषधीय पौधों के साथ ही विदेशी प्रजाति के पौधे भी लगाए जा रहे हैं। इसके बाद नवग्रह वाटिका को भी इसमें जगह दी जाएगी। बॉटेनिकल गार्डेन में वाटिका को विकसित किया जाएगा। छात्रों को पौधों के द्वारा ग्रहों के उपचार में इस्तेमाल होने वाले पौधों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। प्रधानाचार्य डॉ. दुबे ने बताया कि चिंतामणि वाटिका की रक्षा और विकसित करने की जिम्मेदारी बाल सेना को सौंपी गई है। छात्रों की यह बालसेना पूरी तरह से वाटिका के विकास के लिए समर्पित है।
दूसरे विद्यालय के छात्रों को भी मिलेगा लाभ
चिंतामणि वाटिका दूसरे विद्यालय के छात्रों के लिए भी खोली जाएगी। प्रधानाचार्य ने बताया कि वह छात्रों को आमंत्रित करेंगे और दूसरे विद्यालय के प्रधानाचार्यों से आह्वान भी करते हैं कि वह अपने परिसर में इस तरह की वाटिका जरूर तैयार करें। इससे छात्रों को लुप्तप्राय हो रहे पौधे के साथ ही उनके औषधीय इस्तेमाल की भी जानकारी हो सकेगी। आम आदमी के लिए यह वाटिका खुली रहेगी।
ये होंगे पौधे
औषधीय पौधे
अर्जुन, एलोवेरा, सुपारी, नीम, टेसू, बेल, धनिया, दालचीनी, कालमेघ, हरड़, बहेड़ा, अगर, विधारा, पुनर्नवा, तुलसी, आंवला, बबूल,ब्राह्मïी, सेनाय, मुलेठी, पिप्पली, नागरमोथा, शतावरी, अश्वगंगधा।
फलदार
आम, अमरूद, केला, पपीता, जामुन, नींबू आदि।
फूलदार
गुलाब, बेला, जूही, चंपा, चमेली, गेंदा।
नवग्रह वाटिका
सूर्य के लिए सफेद मदार, चंद्रमा के लिए पलाश, मंगल के लिए खैर, बुध के लिए अपामार्ग, बृहस्पति के लिए पीपल, शुक्र के लिए गूलर, शनि के लिए शमी, राहु के लिए चंदन और दूर्वा, केतु के लिए असगंध अर्थात कुश।