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वाराणसी के DM ने भरा जुर्माना : नदियों को लेकर NGT ने लिया एक्शन, पूछा एक सवाल; अब 2025 में होगी सुनवाई

Fri, 13 Dec 2024 09:38 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News : वाराणसी में नदियों की सफाई को लेकर अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्त रूप अख्तियार किया है। इस मामले में डीएम को भी जुर्माना भरना पड़ गया। साथ ही एनजीटी ने यह भी कहा कि यह जुर्माना आम जनता के पैसे का नहीं होना चाहिए। अब असि-वरुणा का 100 वर्ष पूर्व के राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार सीमांकन होगा।
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जिलाधिकारी एस. राजलिंगम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने असि-वरुणा के अतिक्रमण पर सख्त रुख अख्तियार किया है। सख्ती की वजह से ही जिला प्रशासन ने 100 वर्ष पहले के राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, असि-वरुणा के सीमांकन का निर्णय लिया है। 6 मई 2025 तक सीमांकन करने और अतिक्रमण हटाने की योजना बनाई है। 

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यह जानकारी एनजीटी के सामने राज्य सरकार के अधिवक्ता ने दी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने एनजीटी को बताया कि वाराणसी के डीएम ने 10 हजार जुर्माना भर दिया है। इस पर एनजीटी की पीठ ने कहा कि डीएम अपने निजी मद से जुर्माना भरें। आम जनता के पैसे का नहीं।

एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डाॅ. ए सेंथिल वेल की संयुक्त पीठ के समक्ष शुक्रवार को असि-वरुणा नदी मामले की सुनवाई हुई। इसमें बताया गया कि असहयोग के कारण ही गत छह अगस्त को डीएम पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। अधिवक्ता सौरभ तिवारी की तरफ से दायर याचिका और एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान ही राज्य सरकार और डीएम के अधिवक्ता पक्ष रख रहे थे।

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राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार सीमांकन होगा
अधिवक्ता ने एनजीटी को बताया कि राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की के साथ एमओयू (समझौता) गत सात दिसंबर को हो चुका है। राज्य सरकार के अधिवक्ता के अनुसार छह मई तक असि व वरुणा नदी के बाढ़ मैदानी क्षेत्र का सीमांकन गंगा ऑर्डर 2016 के अनुसार किया जाएगा। असि-वरुणा का 100 वर्ष पूर्व के राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार सीमांकन होगा।



एनजीटी ने कहा कि तय समय में अतिक्रमण हटाएं, जिस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि जब बाढ़ का क्षेत्र एक बार तय हो जाएगा, तब असि और वरुणा नदी से अतिक्रमण को हटा दिया जाएगा। एनजीटी ने पूछा कि 23 नवंबर 2021 के आदेश के अनुसार असि-वरुणा नदी के जीर्णोद्धार के लिए एक स्थायी पर्यावरणविद की नियुक्ति की जानी थी, क्या वह हुई? इस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अनभिज्ञता जताई। 

एनजीटी ने असि नदी में लगाए गए एडवांस ऑक्सीडेशन प्लांट पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति ली गई है ? एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि से पहले ही जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले में अगली सुनवाई अगले वर्ष 9 अप्रैल 2025 को होगी।
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