राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार सीमांकन होगा
अधिवक्ता ने एनजीटी को बताया कि राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की के साथ एमओयू (समझौता) गत सात दिसंबर को हो चुका है। राज्य सरकार के अधिवक्ता के अनुसार छह मई तक असि व वरुणा नदी के बाढ़ मैदानी क्षेत्र का सीमांकन गंगा ऑर्डर 2016 के अनुसार किया जाएगा। असि-वरुणा का 100 वर्ष पूर्व के राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार सीमांकन होगा।
एनजीटी ने कहा कि तय समय में अतिक्रमण हटाएं, जिस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि जब बाढ़ का क्षेत्र एक बार तय हो जाएगा, तब असि और वरुणा नदी से अतिक्रमण को हटा दिया जाएगा। एनजीटी ने पूछा कि 23 नवंबर 2021 के आदेश के अनुसार असि-वरुणा नदी के जीर्णोद्धार के लिए एक स्थायी पर्यावरणविद की नियुक्ति की जानी थी, क्या वह हुई? इस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अनभिज्ञता जताई।
एनजीटी ने असि नदी में लगाए गए एडवांस ऑक्सीडेशन प्लांट पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति ली गई है ? एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि से पहले ही जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले में अगली सुनवाई अगले वर्ष 9 अप्रैल 2025 को होगी।