अपनी जड़ों से जुड़ना, अतीत को समझना और सांस्कृतिक पहचान पर विचार करना किसी भी समाज की विकास यात्रा को समझने के लिए जरूरी है। किसी राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसकी सभ्यता, संस्कृति, भाषा, साहित्य और जीवन मूल्यों में निहित होती है। सांस्कृतिक उपन्यास इन मूल्यों से जुड़ने के साथ ही पूर्वजों के विचारों और जीवन दर्शन को समझने की प्रेरणा देते हैं।
ये बातें रविवार को असम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य ने सारनाथ स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के अतिशा सभागार में साहित्यकार इंदीवर के सांस्कृतिक उपन्यास ‘देववंशज : इंद्र समर से मनु तक’ के लोकार्पण समारोह में कहीं। वह कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे।
वेद-उपनिषद से समझी जा सकती है सभ्यतागत यात्रा
राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य ने कहा कि वेद, उपनिषद और संत साहित्य भारत की सभ्यतागत यात्रा के विभिन्न आयामों को सामने रखते हैं। इनके माध्यम से पूर्वजों के विचारों, उपलब्धियों और जीवन दर्शन को समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि काशी की ज्ञान परंपरा यह सिखाती है कि ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य जीवन को बेहतर बनाना और समाज का कल्याण करना है।
देववंशज उपन्यास
- फोटो : अमर उजाला
मनुष्यता के इतिहास को समझने की नई खिड़की
लेखक इंदीवर ने उपन्यास की विशेषताओं और उसकी विषयवस्तु का संक्षिप्त परिचय दिया। साहित्यकार और मुख्य अतिथि हेमंत शर्मा ने कहा कि इंदीवर का उपन्यास ‘देववंशज’ मनुष्यता के इतिहास को समझने की नई खिड़की खोलता है। यह नई जीवन पद्धति की कथा प्रस्तुत करते हुए पाठकों को सृष्टि के विकास की यात्रा तक ले जाता है।
साहित्य और इतिहास के अंतर को समझना जरूरी
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने साहित्य और इतिहास के बीच अंतर को समझने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी रचना की आलोचना एक सीमित दायरे में होनी चाहिए। आलोचना के माध्यम से ही किसी रचना की सार्थकता बनी रहती है।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि ‘देववंशज’ में लेखक ने साहस के साथ तत्कालीन समाज की परिस्थितियों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। यह उपन्यास साहित्य जगत को आईना दिखाने का काम करता है।
संस्कृति में सरलता, दया और करुणा के भाव
केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के कुलपति प्रो. वांगचुक दोर्जे नेगी ने कहा कि संस्कृति जीवन का मूल है। इसमें सरलता, सुंदरता, दया, करुणा और मैत्री के भाव समाहित होते हैं। इंदीवर ने अपनी पुस्तक में इन भावों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।
समारोह में प्रो. बलराज पांडेय, हिमांशु उपाध्याय, डॉ. अनुराग त्रिपाठी, प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह और प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने भी विचार रखे। इससे पहले अतिथियों ने ‘देववंशज : इंद्र समर से मनु तक’ का लोकार्पण किया।
कार्यक्रम का संचालन व्योमेश शुक्ल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. उमेश प्रसाद सिंह ने किया। स्वागत संस्थान की कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा ने किया। इस अवसर पर प्रदेश के आयुष राज्य मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्रा, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह, महापौर अशोक तिवारी सहित साहित्य, शिक्षा और समाज से जुड़े कई लोग मौजूद रहे।