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लॉकडाउन में आपराधिक मामलों की तफ्तीश को लेकर पुलिस सुस्त

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वाराणसी। 26 मई की सुबह चौबेपुर थाना के कमौली गांव में पुरानी रंजिश में एक युवक ने लाइसेंसी बंदूक से पट्टीदारी की महिला को लक्ष्य कर फायरिंग की। संयोग अच्छा था और महिला बाल-बाल बच गई, लेकिन आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सके। इससे पहले चार अप्रैल को फूलपुर क्षेत्र की मुसहर बस्ती में पुलिस टीम पर हमला कर टीयर गैस गन लूट ली गई। दो आरोपियों की धरपकड़ के बाद पुलिस शांत बैठ गई। यह घटनाएं महज बानगी हैं। लॉकडाउन में और उससे पहले जिले भर में ऐसी कई आपराधिक घटनाएं हुई, लेकिन आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सके।
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कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए घोषित लॉकडाउन में जिले की पुलिस सड़क पर डट कर लोगों की मदद करती नजर आई। इस बीच आपराधिक घटनाओं का खुलासा करने के लिए थानों की पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच भी कुछ खास प्रयास करते हुए नहीं दिखी। और तो और, बीते साल शिवपुर स्थित सदर तहसील में दिनदहाड़े बस संचालक की हत्या, मंडुवाडीह क्षेत्र में बुजुर्ग महिलाओं की हत्या, बीएचयू परिसर में बुजुर्ग दुकानदार की हत्या और सारनाथ क्षेत्र में सेना भर्ती की तैयारी करने वाले युवक की हत्या के मामले में भी पुलिस अब तक कुछ खास नहीं कर सकी है। इन वारदातों के बारे में पूछने पर एक ही जवाब मिलता है कि जांच जारी है।
इसके साथ ही अरसे से फरार इनामी अपराधियों के मामले में भी जिले के थानों की पुलिस और क्राइम ब्रांच कुछ खास नहीं कर पाई। पुलिस की इस सुस्त कार्यशैली के कारण पीडि़त थानों का चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं और अपराधी खुले में घूम रहे हैं। इस संबंध में एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि सभी थानाध्यक्षों और क्राइम ब्रांच प्रभारी को कहा गया है कि बड़े आपराधिक मामलों का खुलासा पारदर्शिता के साथ तेजी से करें। विवेचनाओं का निस्तारण समय से और सही से हो। समीक्षा के दौरान जिस किसी का भी कामकाज सही नहीं प्रतीत होगा, वह विभागीय कार्रवाई की जद में आएगा।
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