स्वच्छता और सुरक्षा के मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक है। कई बार कचहरी को बम से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है। इसके बावजूद कोर्ट रूम तक बाहरी लोगों की पहुंच आसान बनी रहती है।
पर्याप्त वॉशरूम उपलब्ध नहीं हैं और एक ही शौचालय का उपयोग कई न्यायालयों में कार्यरत अधिवक्ताओं को करना पड़ता है। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि नए न्यायालय परिसर और कचहरी के विकास कार्यों में क्रेच, नर्सिंग रूम, पर्याप्त वॉशरूम, विश्राम कक्ष, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षित बैठने की व्यवस्था और महिला सुरक्षा से जुड़े विशेष प्रावधान शामिल किए जाएं।
गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ आने वाली माताओं के लिए कोई सुविधा नहीं है। सेंट्रल बार में जगह की कमी के कारण चेंबर भी उपलब्ध नहीं हैं। कचहरी के नए निर्माण में महिलाओं के लिए उचित कॉमन रेस्ट रूम की व्यवस्था होनी चाहिए। - यामिनी शर्मा
महिला वकीलों की बढ़ती संख्या के बावजूद कचहरी में उनके लिए पर्याप्त सुविधाओं का अभाव है। बुजुर्ग महिला अधिवक्ताओं को कोर्ट तक पहुंचने में कठिनाई होती है। एक दिन की बारिश में नालियों पर रखी चौकियों तक पानी भर जाता है। - रितू पटेल
महिलाओं के लिए उचित कॉमन रेस्ट रूम होना चाहिए। महिला अधिवक्ताएं आपस में संवाद कर सकें, इसके लिए अलग व्यवस्था की जाए। महिला अधिवक्ताओं की बढ़ती संख्या के अनुरूप कचहरी के स्वरूप में भी बदलाव होना चाहिए। - अनिता चौबे
स्वच्छता और सुरक्षा के मोर्चे पर स्थिति चिंता जनक है। महिला सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। कचहरी में जिस अनुपात में महिला अधिवक्ताओं की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए नई व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। - रागिनी सिंह
वर्तमान में करीब 400 महिला वकील प्रैक्टिस कर रही हैं, लेकिन उनके लिए चेंबर, वॉशरूम और मातृत्व संबंधी सुविधाएं नहीं हैं। कचहरी का विस्तार या स्थानांतरण हो तो महिलाओं की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। - वंदना सिंह
वकीलों के साथ आने वाले मुवक्किलों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। एक चेंबर में पांच से दस अधिवक्ता प्रैक्टिस करते हैं। कचहरी के पदाधिकारियों को महिला अधिवक्ताओं की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए ठोस पहल करनी चाहिए। - निशा उपाध्याय