वाराणसी। रामनगर स्थित राजकीय बालगृह (बालक) में रहने वाले 43 बालकों में 18 की मानसिक स्थिति सही नहीं है। इनमें तीन बच्चे ऐसे भी हैं जिनको विशेष देखभाल की आवश्यकता है। इसके बावजूद इन बालकों के लिए न तो ट्रेंड नर्स उपलब्ध है और न शिक्षक या ट्रेनर हैं। ऐसे में आसानी से समझा जा सकता है कि यह बालक किस तरह रह रहे होंगे।
राजकीय बालगृह (बालक) में ऐसे 10 बालक ही रखे जा सकते हैं, जिनकी मानसिक स्थिति ठीक न हो। इसके बावजूद यहां 18 ऐसे बालक रह रहे हैं जिनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। बालगृह के अधीक्षक और कर्मचारियों के अलावा यहां कोई भी ऐसा प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं है जो मानसिक रूप से अस्वस्थ बालकों की जरूरत, उनकी मानसिक स्थिति और उनके दर्द का एहसास कर उन्हें उनके ही तौरतरीके से समझा सके।
शुक्रवार को बालगृह का निरीक्षण करने पहुंची जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुधा सिंह मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चों की देखरेख की स्थिति सही न देख कर खासी नाराज हुईं। उन्होंने गृह के अधीक्षक को कहा कि नर्स, शिक्षक और ट्रेनर की आवश्यकता के बारे में तत्काल प्रदेश सरकार को पत्र लिखें। इसके बाद बताएं कि क्या कार्रवाई हुई।
संप्रेक्षण गृह के किशोरों को परिजनों से मिलाएं, समाज के बारे में बताएं
विधिक सचिव सुधा सिंह ने बाल गृह के निरीक्षण के बाद राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) का जायजा लिया। संप्रेक्षण गृह में मौजूद 88 किशोरों से उन्होंने उनके खानपान और समस्याओं की जानकारी ली। गृह के अधीक्षक से कहा कि किशोरों को उनके परिजनों से अवश्य मिलवाया करें। इसके साथ ही उन्हें समाज और परिवार जैसी संस्थाओं के बारे में बताते हुए अच्छे-बुरे का बोध कराएं। उन्होंने किशोरों से कहा कि जिनके पास उनके स्वयं के अधिवक्ता नहीं है उनको विधिक प्राधिकरण की ओर से निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाएगा।