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अध्यापकों से लिया जाए केवल शिक्षण कार्य

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वाराणसी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के भूतपर्व अध्यक्ष प्रो. अख्तर सिद्दिकी ने कहा कि चार वर्षीय बीए, बीएड एवं बीएससी बीएड को लागू करने से पहले विभिन्न स्तरों पर विशेष तैयारी की जरूरत है तथा इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक वातावरण भी बनाना होगा। वह शुक्रवार को शिक्षा कोविड-19 और उसके बाद नई शिक्षा नीति के लिए विचार विषयक वेबिनार को संबोधित कर रहे थे।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय केप्रो. प्रेमनारायण सिंह ने सुझाव दिया कि वर्तमान परिवेश में देश के प्रत्येक जिले के नवोदय विद्यालयों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए एक मानक अध्यापक प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने की पहल करनी चाहिए। दूसरे सत्र में काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने जोर दिया कि विद्यालय के अध्यापकों को जनगणना, मतगणना इत्यादि जैसे कार्यों में न लगाया जाए। उनसे केवल शिक्षण जैसे कार्यों में ही सेवाएं लेनी चाहिए।
डॉ. दीनानाथ सिंह, प्रो. राजेंद्र सिंह ने अध्यापक शिक्षा से जुड़ी बुनियादी बिंदुओं की ओर ध्यान आकृष्ट किया। आयोजन समिति के अध्यक्ष पूर्व कुलपति प्रो. कमलेश पी जोशीपुरा ने फिनलैंड, साउथ कोरिया एवं सिंगापुर की तर्ज पर भारत की अध्यापक शिक्षा में तत्काल एवं आवश्यक सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान डॉ. विवेक जैन, डॉ. प्रवीण तिवारी, प्रो. एस. के. स्वैन, डॉ. अशोक कुमार पांडेय, प्रो. सी. बी. शर्मा ने संबोधित किया। दो दिवसीय वेबिनार में 10 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। रिपोर्ट डॉ. सोमू सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अजय कुमार सिंह ने किया।
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