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वाराणसी सर्किट हाउस के टेलीफोन अटेंडेंट ने नौकरी के नाम पर ऐंठे लाखों रुपये

Wed, 20 Sep 2017 08:11 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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जानकारी पर आरोपी के विरुद्ध सर्किट हाउस के बाकी कर्मचारी लामबंदी - फोटो : Fraud
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उत्तर प्रदेश के दो मंत्रियों को अपना रिश्तेदार बताकर वाराणसी सर्किट हाउस के टेलीफोन अटेंडेंट ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर दर्जन भर से अधिक लोगों से लाखों रुपये ऐंठ लिए। मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब नौकरी न मिलने पर लोगों ने रुपये वापस करने के लिए अटेंडेंट पर दबाव बनाया।
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अटेंडेंट ने रुपये नहीं लौटाए और इसकी जानकारी पाकर जब सर्किट हाउस के दूसरे कर्मचारियों ने हस्तक्षेप का प्रयास किया तो उल्टे उन पर ही रुपये वसूलने का आरोप लगा दिया। अटेंडेंट के विरुद्ध लामबंद 32 कर्मचारियों के हस्ताक्षर युक्त शिकायती पत्र केयर टेकर रामप्रसाद ने बुधवार को डीएम और एसएसपी को देकर कार्रवाई की मांग की।

लोक निर्माण विभाग ने शिकायत के बाद अटेंडेंट को सर्किट हाउस से हटाकर दानगंज डाक बंगले से अटैच कर दिया है। सारनाथ के टड़िया चकबीही का रहने वाला कल्लू राजभर लोक निर्माण विभाग का कर्मचारी है। सर्किट हाउस में वह बतौर टेलीफोन अटेंडेंट कार्यरत था।
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सर्किट हाउस में आने-जाने के दौरान कुछ मंत्रियों से उसकी नजदीकियां बढ़ गई थीं। वह दो मंत्रियों को अपना रिश्तेदार बताकर अन्य कर्मचारियों और परिचितों पर रौब जमाता था। आरोप है कि पिछले तीन महीने में उसने करीब एक दर्जन लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लिए।

काम न होने पर कुछ लोग पैसे लौटाने का दबाव बनाने लगे तो उसने दो लोगों को फर्जी चेक दे दिया। इसी बीच, एक पीड़ित अपने समर्थकों के साथ सर्किट हाउस आया और अटेंडेंट कल्लू को गाड़ी में बैठाकर ले जाने लगा।

जानकारी हुई तो अन्य कर्मचारियों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। विभागीय अधिकारियों से अटेंडेंट की शिकायत की। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एके सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया कल्लू राजभर की गलती सामने आई है, उसे दानगंज डाक बंगले से अटैच कर दिया गया है। रुपये के लेनदेन का आपराधिक मामला है, ऐसे में आगे की कार्रवाई पुलिस करेगी।
 
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फर्जी हस्ताक्षर से 15 लाख निकालने की जांच लटकी

- फोटो : ‌fraud
वाराणसी नगर आयुक्त और मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी (सीएफओ) के फर्जी हस्ताक्षर से नगर निगम के लोहामंडी स्थित इलाहाबाद बैंक खाते से 26 जुलाई को निकाले गए 15 लाख रुपये की रिकवरी अब तक नहीं हो सकी है।

नगर निगम ने चेतगंज थाने में तहरीर दी थी लेकिन अभी जांच में ही पूरा मामला लटका है। फिलहाल नगर निगम ने अपने विभिन्न बैंको के 56 खातों पर किसी भी प्रकार केलेन-देन पर रोक लगा रखी है। फर्जी हस्ताक्षर से धन निकालने की जानकारी नगर निगम प्रशासन को 14 सितंबर को हुई थी।

तब से अब तक न तो चेतगंज थाने में एफआईआर हुई और न ही इसकी रिकवरी की जा सकी है। सीएफओ शिवेंद्र सिंह का कहना है कि एफआईआर के लिए तहरीर दी गई है। चेतगंज पुलिस अभी जांच पड़ताल कर रही है। एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। 
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