आनन-फानन में परिजन आयुष को उपचार के लिए लोहता स्थित क्रिश्चियन अस्पताल ले गए। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की हालत गंभीर होने पर वहां से उन्हें दूसरे स्थान पर ले जाने की सलाह दी गई। इसके बाद परिजन उसे गाजीपुर जिले में एक मंदिर लेकर पहुंचे, जहां झाड़-फूंक कराई गई, लेकिन उसकी मौत हो गई।
मृत्यु के बाद परिजनों ने परंपरा के अनुसार बेटावर घाट पहुंचकर केले के तने से शव को बांधकर गंगा में प्रवाहित कर दिया। घर लौटने के बाद परिवार के लोगों ने उस स्थान की जांच की, जहां आयुष सोया था। वहां दीवार में एक बिल दिखाई दिया। दीवार तोड़ने पर उसके भीतर जहरीला सांप छिपा मिला। इससे आक्रोशित परिजनों ने सांप को मार डाला।
आयुष अपने तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। मासूम की असमय मौत से पिता रविंद्र राजभर, मां उषा देवी और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी घटना के बाद शोक का माहौल है। घटना ने बरसात के मौसम में जहरीले सांपों के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी है।