टैक्स चोरी रोकने और महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए लागू किया गया वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने एक साल तो पूरे कर लिए पर इसकी जटिलताएं अभी भी दूर नही हो पाईं।
इसको लेकर आज भी विभिन्न व्यापारिक संगठन समय-समय पर आवाज उठा रहे हैं। साल भर व्यापारी जीएसटी की समस्याओं में उलझा रहा। पूरा एक साल इसे समझने में ही गुजर गया।
केंद्र और राज्य सरकार के विभाग भी इसे पूरी तरह से लागू नहीं करा पाए और कारोबारियों, उद्यमियों की इसे परेशानी का सबब बताते रहे। जीएसटी लगने के बाद व्यापारियों की संख्या तो बढ़ी है लेकिन व्यापार में कमी आई है। जीएसटी के एक साल पूरे होने पर बनारस में व्यापारी वर्ग ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी।
इन्होनें यह कहा-
जीएसटी लागू होने के बाद भी पर्यटन सस्ता नहीं हो पाया है। जबकि यह माना जा रहा था कि पर्यटन सस्ता होगा और पर्यटको की संख्या भी बढ़ेगी। जीएसटी से होटल व्यवसायियों को फायदा हुआ है। पहले होटल व्यवसायियों को कई तरह के टैक्स देने पड़ते थे लेकिन अब टैक्स से कुछ राहत मिली है। जीएसटी का होटल व्यवसायियों को फायदा मिला है लेकिन टूर ऑपरेटर को कोई लाभ नहीं हुआ।
-राहुल मेहता, अध्यक्ष, टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन
जीएसटी को लेकर इतनी जटिलता है कि व्यापारियों की परेशानी बढ़ गयी है। लघु व मध्यम उद्योगपतियों को जीएसटी से सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है जबकि बड़े व्यापारी को दिक्कत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि वन नेशन वन टैक्स के नारे के साथ जीएसटी को लागू किया गया था लेकिन अभी भी जीएसटी के अलावा भी कई तरह के टैक्स लग रहे हैं उदहारण के लिए मंडी टैक्स, पेट्रोलियम पर लगने वाला कर आदि शामिल है।
-आरके चौधरी, डिवीजनल चेयरमैन, आईआईए
जीएसटी लगने के बाद ये साल व्यपारियों के लिए मुश्किलों भरा रहा है। किसान, व्यापारी सभी परेशान है। इसकी प्रणाली काफी जटिल है और रिटर्न दाखिल करना बहुत मुश्किल भरा काम है।
-हीरालाल मौर्या, वरिष्ठ व्यापारी नेता
जीएसटी लागू होने के बाद व्यापार में बढ़ोत्तरी तो नहीं हुई लेकिन व्यापारी साल भर टेंशन में रहा। इसमें जटिलताएं बहुत हैं जिसके कारण व्यापारी परेशान रहा। जीएसटी लगने के बाद कारोबार कम हुआ है।
-अमरनाथ केशरी, किराना कारोबारी
जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है। हर सामान और हर सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा यानी वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स जैसे करो की जगह सिर्फ एक ही टैक्स लगेगा। संविधान के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारें अपने हिसाब से वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स लगा सकती हैं। अगर कोई कंपनी या कारखाना एक राज्य में अपने उत्पाद बनाकर दूसरे राज्य में बेचता है तो उसे कई तरह के टैक्स दोनों राज्यों को चुकाने होते हैं लेकिन इसको लेकर काफी लोगों को दिक्कत हुई।
-कमलेश अग्रवाल, सीए