वाराणसी में निर्माणाधीन मंडुवाडीह रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) पर रेलवे खास स्वदेशी तकनीक ‘बोस्ट्रिंग गर्डर तकनीक’ से काम करा रहा है। यह तकनीक इतनी उन्नत है कि इस पुल से सेना का टैंक भी गुजारा जा सकेगा।
इस स्वदेशी तकनीक से बनने वाला यह देश का दूसरा पुल होगा। इस तकनीक से पहला और एक मात्र पुल जम्मू कश्मीर के चिनाब नदी पर बनाया गया है।इस तकनीक से ओवरब्रिज के निर्माण में रेलवे ने शुक्रवार को दो पिलरों के बीच एक ब्लॉक का पुल तैयार कर लिया।
अब ब्लॉक पर बोस्ट्रिंग गर्डर तकनीक से पुल को खिसकाने का काम शुरू कर दिया गया। उसे महमूरगंज की ओर सेट किया जाना है। इसके बाद मंडुवाडीह बाजार यानी सब्जी मंडी की ओर ऐसा ही दूसरा पुल तैयार होगा।
शुक्रवार को सुबह पुल के नीचे स्थित शिव मंदिर में पूजा पाठ कर इसे आगे खिसकाने का काम शुरू हुआ। इस काम में निर्माण ब्रिज इकाई गोरखपुर के उप मुख्य अभियंता एनके सिंह और अधिशासी अभियंता राम अवध सिंह के नेतृत्व में 55 टेक्नीशियन और कर्मचारियों की टीम लगी है।
उप मुख्य अभियंता निर्माण ब्रिज इकाई गोरखपुर के एनके सिंह ने बताया कि पुल गर्डर 350 टन का है, जो 64 मीटर लंबा है। 10 मीटर ऊंचे पुल को पावर विंच इलेक्ट्रिक की चार मशीनों से खींचा जा रहा है।
350 टन के गर्डर पर 600 टन का स्लैप डाला जाएगा। इस पुल की क्षमता इतनी है कि आवश्यकता पड़ने पर सेना के टैंक को भी आसानी से ले जाया जा सकता है। इसके लिए रेलवे की तरफ से तीन घंटे का ब्लॉक दिया गया था।