बुंदेलखंड के महोबा से सीधे पूर्वांचल के वाराणसी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र में विकास की बात की। विकास की बयार बहाने और आम आदमी के जीवन में बदलाव लाने की बात कही। कहा, देश तभी आगे बढ़ेगा, जब पूर्वी भारत और विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश विकसित होगा। पूर्वांचल के विकास को लेकर उनकी संजीदगी इससे जाहिर है कि प्रदेश में सत्तारूढ़ दल में पल-पल बदलते राजनीतिक घटनाक्रम पर उन्होंने एक शब्द भी नहीं बोला। उनका पूरा फोकस विकास की योजनाओं पर ही रहा।
सात बड़ी परियोजनाओं का शुभारंभ और लोकार्पण करते हुए पीएम मार्गदर्शक की भूमिका में दिखे। उन्होंने इन्हें सप्तर्षि नाम देते हुए कहा कि जिस तरह आकाश में ‘सप्तर्षि’ अंधेरे में लोगों को रास्ता दिखाता है, वैसे ही यह योजनाएं भी बदलाव लाएंगी। उन्होंने हर योजना की खासियत और उसका प्रभाव भी विस्तार से बताया। लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट और हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच प्रधानमंत्री ने परियोजनाओं को अर्थव्यवस्था, कनेक्टिविटी और जीवन स्तर में बदलाव से जोड़ते हुए बताया कि इनके पूरा होने पर विकास की बयार किस तरह बहेगी।
ऊर्जा गंगा को उन्होंने पेट्रो उत्पादों के लिहाज से दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने वाला बताया तो वाराणसी इलाहाबाद के बीच दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण की परियोजना को रेलवे के आधुनिकीकरण और गतिशीलता से जोड़ दिया। बोले, इन सभी योजनाओं से आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, उद्योग-धंधे लगेंगे और इसका नतीजा पूर्वांचल के विकास के तौर पर देखने को मिलेगा। 750/400 केवी वाराणसी जीआईएस उपकेंद्र को उन्होंने गुणवत्ता युक्त बिजली आपूर्ति और उद्योगपतियों के पूंजी निवेश और स्थानीय लोगों के नौकरी के महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर गिनाया। राजातालाब में बनने वाले पेरिशेबल कार्गो सेंटर को उन्होंने किसानों के मोल-भाव की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ इससे उनके जीवन स्तर में बदलाव लाने वाला बताया।
प्रधानमंत्री ने यूनेस्को के क्रिएटिव सिटी नेटवर्क में संगीत के शहर के रूप में शुमार हुए बनारस घराने के संगीत का भी बखान किया। संगीत की दुनिया के तार उन्होंने बनारस पर डाक टिकट जारी करने के बहाने छेड़ा। उन्होंने जताया कि डाक टिकट जारी करने की परिकल्पना संगीत की इसी खुशबू से प्रभावित होकर की गई। प्राचीन काशी पर डाक टिकट जारी करते हुए पीएम ने इसी बहाने संगीत-कला की परंपरा के उत्थान की दिशा में बढ़ने की अपनी भावना को साझा किया। कहा कि संगीत की दुनिया ने काशी को बहुत कुछ दिया है। इसे सहेजने की जरूरत है। इससे दुनिया में पहचान के साथ ही काशी का गौरव गान होगा। डाक टिकट पुरातन शहर की नए तरीके से विश्व भर में पहचान बनाने का बड़ा कदम साबित होगा।
प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि पहले एक सरकार शिलान्यास करती थी। दूसरी या तीसरी सरकार उद्घाटन करती थी। शिलान्यास के पत्थर इधर-उधर पड़े रहते थे। हमारी सरकार बनने के बाद शिलान्यास भी हम करते हैं, उद्घाटन भी हम ही करना चाहते हैं। इससे समय और धन की ही बचत नहीं होती है, गुणवत्ता भी कायम रहती है। उन्होंने डीरेका के विस्तारीकरण का जिक्र करते हुए कहा कि यह काम रेलवे ने समय से पहले पूरा कर दिया है। योजनाएं सिर्फ अखबारों में छपने के लिए नहीं होती हैं, जन सामान्य के जीवन में बदलाव के लिए होती हैं।