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जी-20 के एफडब्ल्यूसी की बैठक से विश्व पर्यटन मानचित्र पर चमका काशी

Fri, 31 Mar 2017 10:43 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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काशी में एफडब्ल्यूजी की बैठक खत्म, अगली बैठक अर्जेंटीना में होगी - फोटो : अमर उजाला
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काशी में हुई जी-20 देशों के फ्रेमवर्क वर्किंग ग्रुप (एफडब्ल्यूजी) की दो दिनी बैठक से यहां पर्यटन की नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं। विश्व के पर्यटन मानचित्र पर काशी को नई पहचान मिली है। खासकर जी-20 देशों में। पर्यटन से जुड़े विशेषज्ञ इसे सांस्कृतिक टूरिज्म के नए दौर की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।
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उनका मानना है कि काशी आने वाले परंपरागत विदेशी सैलानियों से इतर अब जी-20 से जुड़े दूसरे देशों से पर्यटकों की आमद बढ़ेगी। जहां से अब तक इक्का-दुक्का सैलानी ही कभी-कभार आया करते थे। उधर, पर्यटन बूम की नई संभावनाओं से होटल इंडस्ट्री और पर्यटन कारोबार से जुड़े उद्यमी बेहद उत्साहित हैं।

जी-20 के एफडब्ल्यूजी की बैठक के यहां आयोजन के पीछे केंद्र सरकार का एक बड़ा उद्देश्य पर्यटन विस्तार भी था। इस बैठक ने विश्व के लगभग सभी विकसित और विकासशील देशों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सुरक्षा और सुविधाओं के स्तर पर भी यहां की छवि सुदृढ़ हुई है।
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जी 20 के सदस्यों में भारत के अलावा अर्जेंटीना, आस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका एवं यूरोपियन संघ शामिल है। अब तक चीन, जापान, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, रूस को छोड़ दिया जाए तो बाकी देशों से यहां सैलानियों की आवक बेहद कम रही है।

अब एफडब्ल्यूजी की बैठक के बाद माना जा रहा है कि बाकी सदस्य देशों से पर्यटकों की आमद बढ़ेगी। खुद एफडब्ल्यूसी के प्रतिनिधियों का भी यही मानना था। पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के नाते जी-20 देशों के यहां आए डेलीगेट्स में भी काशी को जानने-समझने की एक अलग उत्सुकता दिखी।

अधिकतर का कहना था कि वे अपने देश लौटकर यहां के बारे में लोगों को बताएंगे। उनका कहना था कि काशी और यहां की संस्कृति अनोखी है। गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि कई डेलीगेट्स ने परिवार के साथ यहां आने की बात कही है। 
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काशी की कहानी प्रतिनिधियों की जुबानी

प्रतिनिधियों ने देखी थी गंगा आरती - फोटो : अमर उजाला
एफडब्ल्यूजी की बैठक में आए जापान के प्रतिनिधि तोशी ने कहा, काशी बिल्कुल उनके प्राचीन शहर क्योटो जैसी है। जापान और भारत की मित्रता काफी पुरानी है। आर्थिक मामलों के साथ ही विकास योजनाओं पर हम साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। खासकर काशी को क्योटो की फ्रैंडशिप सिटी की तरह विकसित किया जाना है। साथ ही, यहां के हेरिटेज को संरक्षित किया जाना है। इन सभी पहलुओं पर हमारी सरकार साथ मिलकर काम करेगी।

सारनाथ के पुरातात्विक स्थलों के भ्रमण के दौरान अर्जेंटीना से आए प्रतिनिधि फेरीदिकोत्रा ने कहा कि यहां एक अलग सुकून है, शांति है। यहां आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा। काशी के बारे में जैसा सुना था, उससे कहीं अधिक अच्छा लगा यहां आकर। वह आर्गनाइजेशन से आग्रह करेंगे कि भविष्य में भी बैठकें ऐसे ही स्थान पर हों।


स्पेन के प्रतिनिधि अलिखांदो भी अभिभूत नजर आए। कहा कि यह शहर देखने-घूमने लायक है। गंगा घाटों से लेकर सारनाथ तक यहां सब कुछ बेहद खास है। वे यहां से लौटने के बाद अपने देश में लोगों को बताएंगे कि कम से कम एक बार तो इस शहर को जरूर देखना चाहिए। यहां विकास के साथ पर्यटन विस्तार की असीम संभावनाएं हैं।

अर्जेंटीना की इफ्तफेनिया कंपनियलो ने कहा कि यह अनोखा शहर है। यहां आकर एक अलग अहसास हुआ। मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। गंगा घाटों से लेकर सारनाथ तक सभी नजारे बेहद खास थे।

ब्राजील के इरिफाल गोमेज ने कहा कि काशी में किसी को भी प्रभावित करने की क्षमता है। यहां की ऐतिहासिक धरोहरें, यहां के घाट, गंगा सब शानदार है। यहां पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं हैं।



स्विट्जरलैंड के फीनार ने कहा कि यह प्राचीन शहर अपने आप में स्पेशल है। यहां का अनुभव बिल्कुल अलग रहा। अपनी बेहतरीन संस्कृति है यहां की। मेरी जिंदगी का यह एक यादगार पल बन गया।

मैक्सिको के जेवियर गंगा आरती और घाट का नजारा वाकई बेहद शानदार था। मणिकर्णिका घाट पर लोगों की आस्था के बीच बहुत अलग अनुभव रहा। यहां आकर बहुत अच्छा लगा। सब कुछ बहुत अच्छा था।  
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पर्यटन विकास के कार्यों में आएगी तेजी

डेलीगेट्स ने काशी से सारनाथ तक की खूबसूरती को शिद्दत से निहारा - फोटो : अमर उजाला
जी20 की बैठक के बाद केंद्र सरकार की कोशिश होगी यहां पर्यटन विस्तार की योजनाओं को तेजी से पूरा कराने की। जानकारों की मानें तो वर्ल्ड बैंक की अरबन डेवलपमेंट के तहत सारनाथ की विकास योजनाओं को जल्द से जल्द मूर्तरूप देने की कोशिशें परवान चढ़ेंगी। इसके तहत एमआरसी सेंटर के विकास के साथ ही ठेला, रेहड़ी वालों के लिए शापिंग सेंटर की स्थापना होनी है। सारनाथ के इर्द-गिर्द शिल्प और धरोहरों को संरक्षित और विकसित करने की भी योजना है। 



 
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