काशी में हुई जी-20 देशों के फ्रेमवर्क वर्किंग ग्रुप (एफडब्ल्यूजी) की दो दिनी बैठक से यहां पर्यटन की नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं। विश्व के पर्यटन मानचित्र पर काशी को नई पहचान मिली है। खासकर जी-20 देशों में। पर्यटन से जुड़े विशेषज्ञ इसे सांस्कृतिक टूरिज्म के नए दौर की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।
उनका मानना है कि काशी आने वाले परंपरागत विदेशी सैलानियों से इतर अब जी-20 से जुड़े दूसरे देशों से पर्यटकों की आमद बढ़ेगी। जहां से अब तक इक्का-दुक्का सैलानी ही कभी-कभार आया करते थे। उधर, पर्यटन बूम की नई संभावनाओं से होटल इंडस्ट्री और पर्यटन कारोबार से जुड़े उद्यमी बेहद उत्साहित हैं।
जी-20 के एफडब्ल्यूजी की बैठक के यहां आयोजन के पीछे केंद्र सरकार का एक बड़ा उद्देश्य पर्यटन विस्तार भी था। इस बैठक ने विश्व के लगभग सभी विकसित और विकासशील देशों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सुरक्षा और सुविधाओं के स्तर पर भी यहां की छवि सुदृढ़ हुई है।
जी 20 के सदस्यों में भारत के अलावा अर्जेंटीना, आस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका एवं यूरोपियन संघ शामिल है। अब तक चीन, जापान, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, रूस को छोड़ दिया जाए तो बाकी देशों से यहां सैलानियों की आवक बेहद कम रही है।
अब एफडब्ल्यूजी की बैठक के बाद माना जा रहा है कि बाकी सदस्य देशों से पर्यटकों की आमद बढ़ेगी। खुद एफडब्ल्यूसी के प्रतिनिधियों का भी यही मानना था। पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के नाते जी-20 देशों के यहां आए डेलीगेट्स में भी काशी को जानने-समझने की एक अलग उत्सुकता दिखी।
अधिकतर का कहना था कि वे अपने देश लौटकर यहां के बारे में लोगों को बताएंगे। उनका कहना था कि काशी और यहां की संस्कृति अनोखी है। गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि कई डेलीगेट्स ने परिवार के साथ यहां आने की बात कही है।