एक औघड़ बाबा ने कतार में लगे श्रद्धालुओं से कहा, “ओम नमो नारायण। शिव को पहचानो, अपने आपको जानो। जब अपने आपको जानोगे तो शिव को पहचान लोगे।” उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि जिस तरह वे शिव की सेवा कर रहे हैं, उसी तरह अपनी मां की भी सेवा करें।
इस बार पश्चिम बंगाल, बिहार और असम से आने वाले कांवड़ियों की संख्या भी काफी रही। बच्चों में भी बाबा के दर्शन को लेकर उत्साह नजर आया। एलकेजी के पांच वर्षीय कौशल और यूकेजी की सात वर्षीय नंदिनी प्रयागराज से दादा-दादी के साथ कंधे पर गंगाजल लेकर काशी पहुंचे। दोनों ने करीब चार से पांच घंटे कतार में लगकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए।
कई डाक बम भी बिना डीजे और तड़क-भड़क के मौन धारण कर यात्रा करते नजर आए। हालांकि, गंगा स्नान के बाद कतार में लगे कुछ कांवड़ियों ने गर्मी और उमस को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि अन्य धामों में कतार के दौरान एसी की व्यवस्था रहती है, जबकि यहां तेज धूप और उमस में घंटों खड़ा रहना पड़ रहा है।