कोहरे के चलते दृश्यता बेहद कम होने पर भी अब लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमानों की लैंडिंग हो सकेगी। विमानों के उड़ान भरने और उतरने में सबसे महत्वपूर्ण उपकरण इंस्टूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) कैट थ्री-सी से इस एयरपोर्ट को जल्द लैस किया जाएगा।
यह अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा अभी आईएलएस कैट वन प्रणाली से युक्त है। कैट वन प्रणाली के उपकरण द्वारा विमानों के उतरने और उड़ान भरने के लिए 800 मीटर से अधिक दृश्यता की आवश्यकता होती है, जबकि देश के सभी महत्वपूर्ण मेट्रो हवाईअड्डों पर कैट थ्री- ए, कैट थ्री-बी और सी तक के सिस्टम इंस्टाल किए जा चुके हैं।
कैट थ्री-सी प्रणाली में दृश्यता शून्य होने की स्थिति में भी विमान आसानी से लैंडिंग और टेकऑफ कर सकेंगे। बाबतपुर हवाईअड्डे पर फिलहाल 800 मीटर से कम दृश्यता होने पर विमान नहीं उतर पाते हैं। कोहरे के दौरान रनवे न दिखाई देने की दशा में विमान हवा में ही चक्कर लगाते रह जाते हैं।
इससे हवाई जहाज का काफी फ्यूल बर्बाद हो जाता है और एयरलाइंस कंपनियों को लाखों की चपत लगती है। हालांकि अब मौसम विभाग सहित उड्डयन मंत्रालय के अत्याधुनिक संसाधनों के जरिये घना कोहरा और दृश्यता के बारे में जानकारी पहले ही हो जाती है।
ऐसे में एयर लाइंस कंपनी की ओर से विमान की अगले हवाई अड्ड के लिए उड़ान पहले ही रोक ली जाती है। दिन भर दृश्यता सामान्य न होने की दशा में उड़ान रद्द भी कर दी जाती है। ऐसा करने से एयरलाइंस कंपनी द्वारा अपनी तो बचत कर ली जाती है लेकिन यात्रियों को समस्या का सामना करना पड़ता है।