जानि राम सेवा सरस, समुझि करब अनुमान, पुरुषा ते सेवक भए, हर ते भे हनुमान... अर्थात श्रीराम की सेवा में परम आनंद के कारण पितामह ब्रह्माजी सेवक जामवंत बन गए और शिव जी हनुमान हो गए। त्रेतायुग की तरह एक बार फिर से बाबा विश्वनाथ प्रभु श्रीराम के स्वरूप में काशीवासियों को दर्शन देंगे। बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव 14 फरवरी को वसंत पंचमी पर मनाया जाएगा।
360 साल के इतिहास में पहली बार बाबा विश्वनाथ अपने आराध्य भगवान राम के स्वरूप में महंत आवास पर विराजेंगे। बाबा विश्वनाथ की रजत प्रतिमा का भगवान राम के स्वरूप में शृंगार किया जाएगा। बाबा के तिलकोत्सव के साथ ही काशी में फागुन उत्सव की शुरुआत हो जाएगी। महंत आवास पर निभाई जाने वाली इस परंपरा में काशी की जनता ही बराती और घराती भी होती है। पहली बार काशी के मंदिरों की सहभागिता भी इस तिलकोत्सव को भव्य स्वरूप देगी।
टेढ़ी नीम स्थित महंत आवास पर तिलकोत्सव की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। बाबा विश्वनाथ के तिलकहरू 14 फरवरी को शुभ मुहूर्त में बाबा का तिलक चढ़ाने पहुंचेंगे। तिलकोत्सव के दौरान शहनाई के साथ ही डमरू वादन के साथ ही बाबा का तिलक चढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही काशी में होली के रंग बिखरने लगेंगे। राम के स्वरूप में बाबा विश्वनाथ के दर्शन देने के कारण काशीवासियों पर भी रामलला का रंग सिर चढ़कर बोलेगा।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के कारण पूरे देश में उल्लास है। भोले शंकर के आराध्य भगवान राम हैं और भगवान राम के आराध्य बाबा विश्वनाथ हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है कि शिव द्रोही मम दास कहावा सो नर मोहि सपनेहु नहि पावा... अर्थात् जो शिव का द्रोह करके मुझे प्राप्त करना चाहता है वह सपने में भी मुझे प्राप्त नहीं कर सकता। इस बार बाबा विश्वनाथ को राम के स्वरूप में सजाया जाएगा। काशी की जनता को पहली बार शिव और राम के एक साथ ही दर्शन होंगे। यह पहला मौका होगा जब काशी के मंदिरों की तिलकोत्सव में सहभागिता होगी।
रजत पालकी में विराजेंगे बाबा विश्वनाथ
तिलकोत्सव पर बाबा विश्वनाथ की पंचबदन चल रजत प्रतिमा का पंचामृत स्नान के बाद पूजन होगा। खादी के परिधान में बाबा विश्वनाथ को रजत पालकी में विराजमान कराया जाएगा। इसके साथ ही बाबा विश्वनाथ की भगवान राम के स्वरूप में भव्य झांकी सजाई जाएगी।
सिर्फ जन्माष्टमी पर बनते हैं हरि बाबा विश्वनाथ
बाबा विश्वनाथ को जन्माष्टमी पर हरि स्वरूप में सजाया जाता है। हर साल जन्माष्टमी पर महंत आवास पर बाबा विश्वनाथ की प्रतिमा का हरि स्वरूप में शृंगार किया जाता है।