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Varanasi Airport: लंदन एयरपोर्ट की तरह बायोमेट्रिक कैमरे, दुबई जैसी कॉन्टेक्टलेस सिक्योरिटी; एआई की पैनी नजर

Thu, 13 Aug 2026 10:47 AM IST
Pragati Chand अभिषेक मिश्र, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी एयरपोर्ट की सुरक्षा हाईटेक होगी। विस्तारीकरण के बाद विदेशों की तरह यहां भी सुविधाएं होंगी। एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ का मानव बल घटेगा। तीसरी आंख का पहरा बढ़ेगा। 
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वाराणसी एयरपोर्ट का मॉडल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Varanasi News: लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के विस्तार के साथ ही यहां सुरक्षा व्यवस्था का स्वरूप भी बदलने की तैयारी है। नए और विस्तारित एयरपोर्ट परिसर में लंदन और दुबई एयरपोर्ट की तरह स्मार्ट सर्विलांस, ऑटोमेटेड स्क्रीनिंग, बायोमेट्रिक पहचान, एक्सेस कंट्रोल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी जैसी तकनीक का इस्तेमाल होगा। नए एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ के जवानों की संख्या घटेगी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से जल्द ही सुरक्षा को लेकर नए निर्देश जारी होंगे। अभी एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए स्वीकृत बल में एक कमांडेंट, तीन असिस्टेंट कमांडेंट, 12 इंस्पेक्टर समेत सब इंस्पेक्टर और अन्य रैंक के जवान समेत कुल 450 कर्मचारी शामिल हैं।

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वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत नई टर्मिनल बिल्डिंग, टनल और रनवे बनाया जा रहा है। यह सभी काम दिसंबर तक पूरे हो जाएंगे। इसके बाद यात्री क्षमता तीन गुना बढ़ जाएगी। मौजूदा समय में एयरपोर्ट पर सालाना 39 लाख यात्रियों का आवागमन होता है। जबकि विस्तारीकरण के बाद यह संख्या बढ़ कर एक करोड़ यात्री प्रतिवर्ष होगी। इतनी बड़ी संख्या पर बारीकी से नजर रखने के लिए हाईटेक सिक्योरिटी सिस्टम लगाया जाएगा। 
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इसका उद्देश्य कम मानव बल में अधिक प्रभावी निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल पहचान करना होगा। विदेशी एयरपोर्ट पर सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा अत्याधुनिक कैमरा नेटवर्क होता है। अलग-अलग क्षेत्रों में लगे कैमरों की फीड को केंद्रीय कमांड एवं कंट्रोल सेंटर से मॉनिटर किया जाता है। 

उसी प्रकार वाराणसी एयरपोर्ट पर भी प्रभावी नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इससे सामान्य निगरानी के साथ संदिग्ध गतिविधि, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश, किसी वस्तु का असामान्य तरीके से पड़ा रहना या किसी व्यक्ति के व्यवहार में असामान्यता जैसी स्थितियों को तकनीक के जरिये तुरंत चिह्नित कर लिया जाएगा।

450 से घट कर 350 हो जाएगी सीआईएसएफ की संख्या
सीआईएसएफ की ओर से मौजूदा समय में 450 बड़े-छोटे कर्मचारी एयरपोर्ट की सुरक्षा करते हैं। नई सुरक्षा प्रणाली के तहत जवानों की संख्या घटाकर करीब 300 कर दी जाएगी। इसके लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से सर्वे करा लिया गया है। नई एसओपी तैयार की जा रही है। हालांकि अगर विदेशों की तर्ज पर सुरक्षा के मॉड्यूल को नहीं अपनाया गया, तो सीआईएसएफ के जवानों की संख्या को बढ़ा कर 650 तक किया जा सकता है। इसका निर्णय जल्द ही होगा।

एयरपोर्ट पर होगा कड़ा डिजिटल नियंत्रण
हाईटेक एयरपोर्ट सुरक्षा में सिर्फ यात्री ही नहीं, बल्कि एयरपोर्ट परिसर में प्रवेश करने वाले कर्मचारियों, एजेंसियों और अधिकृत वाहनों की भी निगरानी भी होगी। इसके लिए डिजिटल एक्सेस कंट्रोल, स्मार्ट कार्ड, बायोमेट्रिक सत्यापन और निर्धारित क्षेत्रों के लिए अलग-अलग अनुमति जैसी व्यवस्थाएं इस्तेमाल की जाएंगी। यात्रियों की पहचान और आवाजाही को आसान तथा सुरक्षित बनाने के लिए बायोमेट्रिक तकनीक का इस्तेमाल होगा। बैगेज की जांच के लिए आधुनिक एक्स-रे और विस्फोटक पदार्थों की पहचान करने वाली तकनीक का इस्तेमाल होगा।

एआई का बढ़ेगा इस्तेमाल, तुरंत पकड़ में आएंगी संदिग्ध गतिविधियां
वाराणसी एयरपोर्ट सुरक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके रडार में आते ही कोई भी संदिग्ध गतिविधि या यात्री तुरंत पकड़ में आएगा। एआई आधारित सर्विलांस और वीडियो एनालिटिक्स को शामिल किया जाएगा। इससे हर कैमरे की स्क्रीन को लगातार देखने की आवश्यकता कम होगी।

लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट की तरह।
  • सभी टर्मिनलों की सुरक्षा लेन में आधुनिक सीटी स्कैनर तैनात होंगे।
  • बायोमेट्रिक डिवाइस लगेंगे।
  • हीथ्रो की तरह ही यहां भी सुरक्षा और बॉर्डर सिक्योरिटी के लिए बायोमेट्रिक कैमरों और फेस-रिकॉग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल होगा।

दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरह
  • स्मार्ट गेट्स होंगे जिससे यात्रियों की पहचान के साथ कुछ सेकंड में इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी होगी।
  • फेस और आईरिस रिकॉग्निशन लगेगा।
  • एआई आधारित बॉर्डर कंट्रोल होगा।
  • कांटेक्ट लेस सिक्योरिटी होगी। इससे यात्री को बार-बार पासपोर्ट या बोर्डिंग पास निकालने की जरूरत न पड़ेगी।
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अमेरिका के बड़े एयरपोर्ट की तरह
  • ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन होगा।
  • सीटी व एक्सरे बैगेज स्कैनिंग होगी।
  • बॉडी स्कैनर लगेंगे।
  • विस्फोटक का पता लगाने वाली मशीनें लगेंगी।
 
विस्तारीकरण के बाद विमानों और यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ ही एयरपोर्ट का दायरा भी बढ़ेगा। विदेशों से कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी। ऐसे में सुरक्षा को लेकर बड़ी जिम्मेदारी होगी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से सुरक्षा को लेकर नए मानक तय किए जा रहे हैं। इसमें सीआईएसएफ की संख्या घटने और बढ़ने दोनों की संभावना है। मंत्रालय की ओर से निर्देश जारी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। -सुचिता सिंह, सीआईएसएफ कमांडेड, वारणसी एयरपोर्ट
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