इसका उद्देश्य कम मानव बल में अधिक प्रभावी निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल पहचान करना होगा। विदेशी एयरपोर्ट पर सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा अत्याधुनिक कैमरा नेटवर्क होता है। अलग-अलग क्षेत्रों में लगे कैमरों की फीड को केंद्रीय कमांड एवं कंट्रोल सेंटर से मॉनिटर किया जाता है।
उसी प्रकार वाराणसी एयरपोर्ट पर भी प्रभावी नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इससे सामान्य निगरानी के साथ संदिग्ध गतिविधि, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश, किसी वस्तु का असामान्य तरीके से पड़ा रहना या किसी व्यक्ति के व्यवहार में असामान्यता जैसी स्थितियों को तकनीक के जरिये तुरंत चिह्नित कर लिया जाएगा।
450 से घट कर 350 हो जाएगी सीआईएसएफ की संख्या
सीआईएसएफ की ओर से मौजूदा समय में 450 बड़े-छोटे कर्मचारी एयरपोर्ट की सुरक्षा करते हैं। नई सुरक्षा प्रणाली के तहत जवानों की संख्या घटाकर करीब 300 कर दी जाएगी। इसके लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से सर्वे करा लिया गया है। नई एसओपी तैयार की जा रही है। हालांकि अगर विदेशों की तर्ज पर सुरक्षा के मॉड्यूल को नहीं अपनाया गया, तो सीआईएसएफ के जवानों की संख्या को बढ़ा कर 650 तक किया जा सकता है। इसका निर्णय जल्द ही होगा।
एयरपोर्ट पर होगा कड़ा डिजिटल नियंत्रण
हाईटेक एयरपोर्ट सुरक्षा में सिर्फ यात्री ही नहीं, बल्कि एयरपोर्ट परिसर में प्रवेश करने वाले कर्मचारियों, एजेंसियों और अधिकृत वाहनों की भी निगरानी भी होगी। इसके लिए डिजिटल एक्सेस कंट्रोल, स्मार्ट कार्ड, बायोमेट्रिक सत्यापन और निर्धारित क्षेत्रों के लिए अलग-अलग अनुमति जैसी व्यवस्थाएं इस्तेमाल की जाएंगी। यात्रियों की पहचान और आवाजाही को आसान तथा सुरक्षित बनाने के लिए बायोमेट्रिक तकनीक का इस्तेमाल होगा। बैगेज की जांच के लिए आधुनिक एक्स-रे और विस्फोटक पदार्थों की पहचान करने वाली तकनीक का इस्तेमाल होगा।
एआई का बढ़ेगा इस्तेमाल, तुरंत पकड़ में आएंगी संदिग्ध गतिविधियां
वाराणसी एयरपोर्ट सुरक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके रडार में आते ही कोई भी संदिग्ध गतिविधि या यात्री तुरंत पकड़ में आएगा। एआई आधारित सर्विलांस और वीडियो एनालिटिक्स को शामिल किया जाएगा। इससे हर कैमरे की स्क्रीन को लगातार देखने की आवश्यकता कम होगी।
दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरह
- स्मार्ट गेट्स होंगे जिससे यात्रियों की पहचान के साथ कुछ सेकंड में इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी होगी।
- फेस और आईरिस रिकॉग्निशन लगेगा।
- एआई आधारित बॉर्डर कंट्रोल होगा।
- कांटेक्ट लेस सिक्योरिटी होगी। इससे यात्री को बार-बार पासपोर्ट या बोर्डिंग पास निकालने की जरूरत न पड़ेगी।
अमेरिका के बड़े एयरपोर्ट की तरह
- ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन होगा।
- सीटी व एक्सरे बैगेज स्कैनिंग होगी।
- बॉडी स्कैनर लगेंगे।
- विस्फोटक का पता लगाने वाली मशीनें लगेंगी।
विस्तारीकरण के बाद विमानों और यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ ही एयरपोर्ट का दायरा भी बढ़ेगा। विदेशों से कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी। ऐसे में सुरक्षा को लेकर बड़ी जिम्मेदारी होगी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से सुरक्षा को लेकर नए मानक तय किए जा रहे हैं। इसमें सीआईएसएफ की संख्या घटने और बढ़ने दोनों की संभावना है। मंत्रालय की ओर से निर्देश जारी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। -सुचिता सिंह, सीआईएसएफ कमांडेड, वारणसी एयरपोर्ट