बढ़ते हवाई दबाव के बीच भविष्य में बढ़ सकती है सीमा
वाराणसी एयरपोर्ट पूर्वांचल के साथ-साथ बिहार और आसपास के राज्यों के यात्रियों के लिए भी प्रमुख हवाई केंद्र बन चुका है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या बढ़ने से यहां हवाई यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। मौसम या तकनीकी कारणों से अन्य शहरों के लिए उड़ान भर रहे विमानों को भी कई बार वाराणसी एयरपोर्ट पर उतारा जाता है। ऐसे में भविष्य में बढ़ते हवाई यातायात को देखते हुए रडार सीमा बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान महत्वपूर्ण होती है रडार निगरानी
किसी भी एयरपोर्ट के आसपास का हवाई क्षेत्र सबसे संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि इसी क्षेत्र में विमान उड़ान भरते और उतरते हैं। ऐसे में टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान रडार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। रडार अपने दायरे में होने वाली गतिविधियों की निगरानी कर संभावित जोखिमों की समय रहते जानकारी उपलब्ध कराता है।
अधिकारी बोले
वाराणसी एयरपोर्ट के एटीसी रडार की सीमा पहले 46 हजार फीट थी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के नियमों और निर्देशों के तहत इसमें बदलाव किया गया है। हालांकि इससे संचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सभी एयरपोर्ट और एटीसी इकाइयां आपस में इंटरकनेक्टेड हैं, इसलिए विमानों की आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध होती रहती है।
-पुनीत गुप्ता, एयरपोर्ट निदेशक, वाराणसी