वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पर कार्यरत युवती से गैंगरेप की वारदात को भले ही होटल रेडिसन में अंजाम दिया गया है लेकिन इसे लेकर बाबतपुर एयरपोर्ट का माहौल गरमाया हुआ है। राजनीतिक दल इसे एयरपोर्ट की धांधलियों और विमानन कंपनियों की मनमानी से जोड़ कर देख रहे हैं। साथ ही, राजनीतिक दल गैंगरेप को मुद्दा बनाने में जुट गए हैं।
इस बीच एयरपोर्ट पर काम करने वाले ज्यादातर अधिकारी और कर्मचारी डरे-सहमे नजर आ रहे हैं। उन्हें आशंका है कि पुलिस किसी भी व्यक्ति से पूछताछ कर सकती है। दरअसल, अब तक के ज्यादातर मामले या तो पीड़ितों के चुप्पी साधने से या फिर किसी प्रभाव के कारण दब गए थे।
अब ये मामला पुलिस तक पहुंच गया है। हर कोई यह भी जानता है कि इस वारदात की पृष्ठभूमि कहीं न कहीं एयरपोर्ट पर ही है। राजनीतिक दलों का मानना है कि अगर एयरपोर्ट की व्यवस्थाओं में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद नहीं होता तो हालात ऐसे नहीं होते।
कहना है कि पूर्व में हुई इस तरह की घटनाओं पर कार्रवाई न होने से नियमों को तोेड़ने वालों का हौसला बढ़ता गया। गैंगरेप की वारदात और एयरपोर्ट पर तैनात कर्मियों की संलिप्तता इसीका नतीजा है।
पूर्व सांसद तूफानी सरोज ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था की बदहाल स्थिति के साथ-साथ यह एयरपोर्ट पर अनियमितताओं का भी नतीजा है।
गैंगरेप मामले की जांच के साथ-साथ इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि एयरपोर्ट पर नियुक्तियों और ठेकों में किस-किस तरह की मनमानी की जाती है। कांग्रेस के पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने कहा कि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों में कानून व्यवस्था का डर नहीं रह गया है। कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय ने भी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
उधर, मछलीशहर के सांसद और एयरपोर्ट सलाहकार समिति के चेयरमैन रामचरित्र निषाद का दावा है कि उन्होंने एयरपोर्ट निदेशक अनिल राय से बातचीत कर कहा है कि जिन भी विमानन कंपनियों के लोग इस शर्मनाक घटना में शामिल हैं, उन्हें निलंबित किया जाए।