दिवाली की रात पटाखों के चलते वाराणसी की आबोहवा में 17 गुना अधिक जहर घुल गया। शाम से लेकर पूरी रात हुई आतिशबाजी ने बनारस के वायु प्रदूषण को कहीं अधिक घातक स्तर पर ला दिया। ये भी चौंकाने वाली ही बात रही कि शहर का सबसे सर्वाधिक हरियाली वाला इलाका डीएलडब्ल्यू और लंका दिवाली की रात सबसे अधिक प्रदूषित रहा। पटाखों के धुएं और शोर के कारण शहर एक खतरनाक गैस चैंबर में तब्दील रहा। सांस, दमा व हृदय रोगियों को परेशानियों का सामना अलग से करना पड़ा।
दिवाली पर सुप्रीम कोर्ट के न तो आदेश का असर हुआ और ना ही पर्यावरणविद व पर्यावरण के लिए कार्य करने वाली संस्थाआें की अपील का ही कहीं असर देखने को मिला। क्लाइमेट एजेंडा की ओर से दिवाली पर 20 अलग अलग इलाकों में वायु गुणवत्ता की निगरानी में प्राप्त आंकड़ों में ये खुलासा हुआ कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्वच्छता मानक के अनुसार पटाखों के चलते दिवाली की रात शहर इस साल के सर्वाधिक वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर रहा।
बीते साल दिवाली के दिन एक्यूआई 338 दर्ज किया गया था लेकिन इस बार स्थिति बेहद खतरनाक रही। इस बार पिछले साल के मुकाबले एक्यूआई दोगुना यानी 628 रहा। इसमें पीएम 2.5 443 और पीएम 10 628 रहा।
प्रशासन ने भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया
क्लाइमेट एजेंडा की मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर ने बताया कि दिवाली से पहले ही बढ़ते स्मॉग की परिस्थितियों को दिवाली पर हुई आतिशबाजी ने और बढ़ा दिया। वायु प्रदूषण की वर्तमान स्थिति की आशंका पहले से होते हुए भी विभाग की ओर से कोई भी निर्देश नहीं जारी किए गए।
वायु प्रदूषण के गंभीर खतरों से बचने के लिए प्रशासन ने भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सीओपीडी विशेषज्ञ व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आरएन वाजपेयी के अनुसार बारूद, कोयला, डीजल, पेट्रोल व कूड़ा जलसे से पीएम 2.5 कणों का निर्माण होता है। ये कण मानव स्वास्थ्य पर खतरनाक असर पड़ता है। पीएम 2.5 के कण सीधा हमारी फेफड़े पर हमला करता है और हृदयाघात, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक का खतरा होता है। पीएम 10 के कणों से त्वचा की बीमारियां, एलर्जी आदि के केस बढ़ते हैं।
सर्वर के चलते हुई समस्या
दिवाली के दिन प्रदूषण नियंत्रण इकाई की ओर से शहर के पांच क्षेत्राें में लगाई गई मशीनों ने तो काम किया लेकिन वेबसाइट पर इसका कोई अपडेट नहीं मिला। सीपीसीबी की वेबसाइट पर देश के कई शहराें के एक्यूआई का अपडेट रहा लेकिन अपने शहर का एक्यूआई नहीं मिला।
इस बारे में प्रदूषण नियंत्रण इकाई के क्षेत्रीय अधिकारी के आनंद का कहना था कि सर्वर की वजह से ये समस्या आई। कई शहरों में भी ये समस्या देखने को मिली। फिलहाल मशीनों से प्राप्त आंकड़ों को शासन स्तर पर अग्रिम कार्ययोजना के लिए भेजा जाएगा।