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वाराणसी: रक्षाबंधन पर 27 वर्ष बाद 11 महायोग में राखी बांधेंगी बहनें, दिन भर मना सकेंगे भद्रा मुक्त त्योहार

Sat, 22 Aug 2026 03:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

पूर्णिमा तिथि एक दिन पहले 27 अगस्त को ही लग जाएगी। मगर, उदया तिथि की मान्यता होने से रक्षाबंधन अगले दिन 28 अगस्त को मनाया जाएगा।
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रक्षा बंधन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बहनें अपने भाइयों को रक्षाबंधन पर दिनभर राखी बांध सकती हैं। सावन पूर्णिमा पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। यह एक दिन पहले ही समाप्त हो जाएगा। वहीं, इस बार 27 साल बाद 11 महायोग बन रहे हैं। सूर्य और गुरु अपनी उच्च राशियों में विशिष्ट योग बना रहे हैं। हालांकि, पूर्णिमा तिथि एक दिन पहले 27 अगस्त को ही लग जाएगी। मगर, उदया तिथि की मान्यता होने से रक्षाबंधन अगले दिन 28 अगस्त को मनाया जाएगा।

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रक्षाबंधन हिंदू और जैन धर्म का त्योहार है। इसे श्रावण (सावन) में मनाए जाने के कारण श्रावणी या सलूनो भी कहते हैं, जो भाई-बहन को स्नेह की डोर में बांधता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के मस्तक पर टीका लगाकर रक्षा सूत्र बांधेंगी। इस बार तमाम नए शुभ योग बनने से यह पर्व और भी फलदायी होगा। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष व प्रख्यात ज्योतिषविद् प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा पर मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 8:31 बजे लग जाएगी, जो अगले दिन सुबह 9:18 बजे तक रहेगी। मगर, उदया तिथि मान्य होने से रक्षाबंधन 28 अगस्त को ही मनाया जाएगा। वहीं, भद्रा पूर्णिमा शुरू होने के साथ उसी दिन रात 8:54 बजे समाप्त हो जाएगी। इसलिए रक्षाबंधन पर इसका कोई साया नहीं रहेगा।

रक्षाबंधन पर अनुष्ठान का समय सुबह 5:41 बजे से 9:18 बजे तक विशिष्ट माना गया है। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन पर 27 वर्ष बाद 11 महायोग बन रहे हैं। शतभिषा नक्षत्र रहेगा। अतिगंड, शोभन, श्रीवत्स, सौम्य और ययीजय योग बनेंगे। ग्रहों के गोचर के चलते रक्षाबंधन पर चंद्राधि और बुधादित्य, विमल विपरीत राजयोग, धन, उभयचरी, शकट और सुनफा योग जैसे योगों का भी निर्माण हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस पर्व का संबंध राजा बलि और महाभारत काल से है।
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चंद्रमा कुंभ और सिंह राशि में होंगे सूर्य
ग्रह गोचर के अनुसार चंद्रमा कुंभ राशि में और सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में रहेंगे। सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। सूर्य सिंह राशि में होने से अत्यंत प्रबल माने जाते हैं। साथ ही गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में होंगे, जो ज्ञान, विद्या, यश और बुद्धि प्रदान करेंगे।

रक्षाबंधन पर रक्षासूत्र बांधते समय कर्मकांडी पंडित या आचार्य ‘येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥’ का उच्चारण करते हैं। इससे इस पर्व का संबंध राजा बलि से स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है।

द्रौपदी ने कृष्ण व कुंती ने अभिमन्यु को बांधी थी राखी
महाभारत में रक्षाबंधन पर्व का उल्लेख है। पांडवों को संकट से बचने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने रक्षाबंधन का त्योहार मनाने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि राखी के रेशमी धागे में वह शक्ति है, जिससे हर आपत्ति से मुक्ति पाई जा सकती है। द्रौपदी ने कृष्ण और कुंती ने अभिमन्यु को राखी बांधने का उल्लेख महाभारत में मिलता है। वहीं, इस रक्षाबंधन का संबंध राजा बलि से भी है। रक्षाबंधन पर अमरनाथ की धार्मिक यात्रा गुरु पूर्णिमा से प्रारंभ होकर रक्षाबंधन को पूर्ण होती है।

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