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वाराणसी: रामनगर में 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले को दी जाएगी मुखाग्नि, हिंदू रीति-रिवाज से होगा अंतिम संस्कार

Mon, 19 Oct 2026 06:42 PM IST
किशन चौबे अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

वाराणसी के रामनगर में विजयादशमी पर 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले को हिंदू रीति-रिवाज से मुखाग्नि दी जाएगी। 15 मजदूरों ने एक माह में पुतला तैयार किया है। मंगलवार शाम रामनगर किले से डॉ. अनंत नारायण सिंह का विजय जुलूस निकलेगा, जो लंका पहुंचकर समाप्त होगा।

 

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रामनगर: रावण का पुतला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला में विजयादशमी पर मंगलवार की रात 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले को मुखाग्नि दी जाएगी। करीब 35 फीट की परिधि वाले इस पुतले को तैयार करने में 15 मजदूर एक माह से जुटे हैं। मंगलवार दोपहर तक पुतले को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। रामनगर की रामलीला में रावण दहन की परंपरा दूसरी जगहों से अलग है। यहां रावण के पुतले को हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार मुखाग्नि देकर उसका अंतिम संस्कार किया जाता है।
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मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम के हाथों रावण के वध के बाद उसके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी विभीषण निभाते हैं। रावण के पूरे परिवार में विभीषण ही जीवित पुरुष सदस्य बचते हैं। इसी परंपरा के तहत रामनगर में भी रावण के पुतले को मुखाग्नि देने से पहले अंतिम संस्कार की रस्में निभाई जाती हैं। हिंदू रीति-रिवाज में अंतिम संस्कार के दौरान जिस तरह पांच लोग मुखाग्नि देने वाले व्यक्ति की अगुवाई में चिता की परिक्रमा करते हैं, उसी तरह यहां भी परिक्रमा की जाती है। इसके बाद रावण के पुतले को आग दी जाती है।
 
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अंतिम संस्कार के समय मौजूद नहीं रहता राजपरिवार
रामनगर की रामलीला में रावण के अंतिम संस्कार से जुड़ी एक और परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है कि राजा के निधन और अंतिम संस्कार के समय राजा स्वयं मौजूद नहीं रहता। इसी परंपरा के चलते काशीराज परिवार का कोई सदस्य रावण के अंतिम संस्कार के समय रामलीला स्थल पर मौजूद नहीं रहता। हालांकि, राजपरिवार के रिश्तेदार रामलीला स्थल पहुंचकर इस परंपरा में भाग लेते हैं।

रामनगर किले से निकलेगा विजय जुलूस
भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के उपलक्ष्य में काशीराज परिवार के डॉ. अनंत नारायण सिंह का विजय जुलूस मंगलवार शाम रामनगर किले से निकलेगा। जुलूस रामलीला स्थल स्थित लंका पहुंचकर समाप्त होगा। इसके बाद मुहूर्त के अनुसार रात में रावण के पुतले को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की परंपरा पूरी की जाएगी।
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