सार
वाराणसी के रामनगर में विजयादशमी पर 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले को हिंदू रीति-रिवाज से मुखाग्नि दी जाएगी। 15 मजदूरों ने एक माह में पुतला तैयार किया है। मंगलवार शाम रामनगर किले से डॉ. अनंत नारायण सिंह का विजय जुलूस निकलेगा, जो लंका पहुंचकर समाप्त होगा।
रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला में विजयादशमी पर मंगलवार की रात 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले को मुखाग्नि दी जाएगी। करीब 35 फीट की परिधि वाले इस पुतले को तैयार करने में 15 मजदूर एक माह से जुटे हैं। मंगलवार दोपहर तक पुतले को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। रामनगर की रामलीला में रावण दहन की परंपरा दूसरी जगहों से अलग है। यहां रावण के पुतले को हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार मुखाग्नि देकर उसका अंतिम संस्कार किया जाता है।
मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम के हाथों रावण के वध के बाद उसके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी विभीषण निभाते हैं। रावण के पूरे परिवार में विभीषण ही जीवित पुरुष सदस्य बचते हैं। इसी परंपरा के तहत रामनगर में भी रावण के पुतले को मुखाग्नि देने से पहले अंतिम संस्कार की रस्में निभाई जाती हैं। हिंदू रीति-रिवाज में अंतिम संस्कार के दौरान जिस तरह पांच लोग मुखाग्नि देने वाले व्यक्ति की अगुवाई में चिता की परिक्रमा करते हैं, उसी तरह यहां भी परिक्रमा की जाती है। इसके बाद रावण के पुतले को आग दी जाती है।