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अमर उजाला पड़ताल: काशी में 489 जर्जर भवन, सबसे ज्यादा 298 कोतवाली व 152 दशाश्वमेध में; विवादों में फंसी मरम्मत

Tue, 09 Jun 2026 03:00 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी जिले में 489 जर्जर भवन लोगों की जान के लिए खतरा बन गए हैं। हर मानसून यहां हादसे का डर बढ़ता है। उधर, नगर निगम नोटिस देकर मुक्त हो जाता है। 
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जर्जर भवन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मानसून की दस्तक के साथ काशी में 489 जर्जर भवन लोगों की जान के लिए खतरा बन गए हैं। नगर निगम हर साल नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है, लेकिन पारिवारिक और किरायेदारी विवादों के कारण इनकी मरम्मत या ध्वस्तीकरण नहीं हो पा रहा है।

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नगर निगम की सूची में दर्ज इन भवनों में सबसे अधिक 258 कोतवाली और 152 दशाश्वमेध क्षेत्र में हैं। 90 फीसदी मामलों में पारिवारिक विवाद, किरायेदारों से मुकदमेबाजी और स्वामित्व संबंधी विवाद बाधा बनते हैं। नतीजतन वर्षों से जर्जर भवन जस के तस खड़े हैं और हर मानसून में खतरा बढ़ जाता है। 

पक्का महाल क्षेत्र की कई गलियों में भवन पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। लालघाट क्षेत्र में एक जर्जर भवन के पास स्कूल संचालित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कभी भी गिर सकता है, जिससे छात्रों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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जर्जर भवन - फोटो : अमर उजाला
मरम्मत में विवादों की बाधा
भवन स्वामी मरम्मत या भवन गिराने के लिए आवेदन तो करते हैं, लेकिन 90 फीसदी मामलों में पारिवारिक विवाद, किरायेदारों से मुकदमेबाजी और स्वामित्व संबंधी विवाद बाधा बन जाते हैं। बेनियाबाग निवासी सुनील यादव और श्रवण कुमार ने किरायेदार विवाद के कारण मरम्मत न होने की बात कही। सीर गोवर्धन निवासी रितेश यादव ने न्यायालय में मामला लंबित होने का जिक्र किया। नगर निगम जनसंपर्क अधिकारी एसके श्रीवास्तव ने बताया कि सभी को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम से भवन गिरवाने पर स्वामियों को पैसा देना पड़ेगा।



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क्षेत्रवार जर्जर भवनों की स्थिति
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, कुल 489 जर्जर भवन चिह्नित हैं। कोतवाली क्षेत्र में सबसे अधिक 238 भवन हैं। दशाश्वमेध में 152, रामनगर में 31 और भेलूपुर में 14 भवन चिह्नित हैं। आदमपुर में 13, वरुणापार में 12 और सारनाथ क्षेत्र में नौ जर्जर भवन हैं।
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