दूसरी तरफ जिला कारागार में भी बंदियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाती है। हाईस्कूल और इंटर की बोर्ड परीक्षा के लिए कैदियों ने पंजीकरण भी कराया है। दोनों जेलों में बंदियों और कैदियों को पढ़ाई से जोड़ने के साथ ही उन्हें कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि जेल से बाहर निकलने के बाद वे रोजगार की राह पकड़ सकें। अपराध की दुनिया से बाहर निकल सकें। सोच बेहतर हो सके और अपने परिवार के साथ ही समाज के लिए अच्छा कर सकें।
क्या बोले अधिकारी
जेल में बंद कैदियों को किताबी ज्ञान के साथ कौशल विकास का हुनर भी दिया जाता है। जिससे जेल से रिहा होने के बाद वह अपने जीवनयापन कर सकें। -राधे कृष्ण मिश्रा, जेल अधीक्षक, केंद्रीय कारागार वाराणसी