सड़क हादसों में घायल को यदि गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। लेकिन बनारस में बीते 730 दिनों में गिने-चुने लोगों ने ही आगे बढ़कर घायलों की मदद की। देरी, डर और उदासीनता के चलते कई बार लोग घायल को सड़क पर उसके हाल पर छोड़ देते हैं। नतीजा, समय से इलाज नहीं मिलने पर जान चली जाती है।
एक साल में 325 जिंदगियां लील गए सड़क हादसें
बनारस की सड़कों पर बीते एक साल में सड़क हादसों में 325 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा न सिर्फ डराने वाला है, बल्कि साल भर में तीन हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें बड़ी संख्या दोपहिया वाहन चालकों की रही। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में हर महीने औसतन सैकड़ों घायल पहुंच रहे हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर होती है।
इन्होंने बचाई जान, गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाया तो मिला सम्मान
1. राकेश कुमार, निवासी हरहुआ
2. रोहित कुमार पटेल, निवासी पिंडरा
3. खंझाटी यादव, निवासी बड़ागांव
4. आरिफ खान, निवासी बाबतपुर
5. सुनील कुमार यादव, निवासी बड़ागांव
6. शुभम कुमार कन्नौजिया, निवासी मझगवां
7. सुनील कुमार जायसवाल, निवासी हरहुआ
8. सत्येंद्र कुमार यादव, निवासी दासेपुर
9. विद्या प्रकाश दूबे, निवासी पांडेयपुर
10. अरविंद कुमार, निवासी हरहुआ
क्या बोले अधिकारी
घायलों की मदद के लिए राहवीर योजना है। शासन ने पांच हजार से राशि बढ़ाकर 25 हजार रुपये की है। गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाने वालों को नकदी के साथ सम्मानित भी किया जाता है। अगर लोग मदद के लिए आगे बढ़े तो सड़क हादसों में मौत की संख्या को कम किया जा सकता है। -सुधांशु रंजन, एआरटीओ प्रवर्तन