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Varanasi News: वल्लभाचार्य प्राकट्यमहोत्सव, विवेक धैर्य और आश्रय का भावपूर्ण मंचन; लोग मुग्ध

Fri, 17 Apr 2026 05:32 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: प्राकट्य महोत्सव के अंतिम दिन चौखंभा स्थित वल्लभगीता कृष्ण भवन में संगीतमय नाट्य प्रस्तुति हुई। नाटक में विवेक, धैर्य और आश्रय के संदेश ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। गोस्वामी परिवार के कलाकारों सहित अन्य पात्रों ने प्रभावशाली अभिनय किया, जिसे खूब सराहना मिली।
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जगद्गुरु वल्लभाचार्य महाप्रभु के प्राकट्य महोत्सव पर नाट्य मंचन। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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जगद्गुरु वल्लभाचार्य महाप्रभु के प्राकट्य महोत्सव के अंतिम दिन बृहस्पतिवार को महाप्रभु की आराधना नाट्य अंतर्मन से हुई। महाप्रभु के जीवन पर आधारित नाटक विवेक, धैर्य और आश्रय के संदेशों को सुन वैष्णवजन परमानंद रस से विभोर हो उठे। पात्रों में पुष्टिमार्ग के सप्तम् पीठ के पीठाधीश्वर गोस्वामी कल्याण राय महाराज के बेटे, बहू ने शानदार अभिनय कर सभी को मुग्ध कर दिया।

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श्री शुद्धाद्वैत जपयज्ञ समिति की ओर से चौखंभा स्थित वल्लभगीता कृष्ण भवन में गोस्वामी कल्याण राय महाराज सानिध्य में संगीतमय नाट्य प्रस्तुति हुई। प्रख्यात रंगकर्मी अनूप अग्रवाल और विनीता नागपुरी के निर्देशन में नाटक का मंचन हुआ जो एक धोबी की वार्ता पर आधारित है।

यह वार्ता साहित्य की एक कहानी नहीं है, बल्कि जीवन के नैतिक मूल्यों के तीन स्तम्भों-विवेक धैर्य और आश्रय का सजीव चित्रण है। कलाकारों ने अभिनय से संदेश दिया कि संघर्ष और संशय की घड़ी में जो मनुष्य विवेक, धैर्य के साथ अडिग रहता है, वही प्रभु के सच्चे पुष्टिमार्ग का अनुगामी बनता है। 

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नाटक ने लोगों को किया प्रभावित

विवेक जब हृदय में स्थिर हो जाए तभी उसे श्रीकृष्ण की कृपा से सत्संग मिलता है। धैर्य प्रेम का सच्चा रूप प्रभु के प्रति पूर्ण निष्काम समर्पण है। नाट्य प्रस्तुति में गोसाई विट्ठलनाथ प्रभु की भूमिका में गोस्वामी कल्याण राय महाराज के बेटे गोस्वामी सुरेश बाबा, चंद्रावली सखी के रूप में उनकी बहू गोस्वामी किर्तना के अभिनय ने खासा प्रभावित किया। 

अन्य पात्रों में विकास दीक्षित, आरती बेन, तनु, नेहा शुक्ला, चंद्रकांत सोनी, श्रयत खन्ना, सरस गुजराती ने भी सशक्त अभिनय किया। गोस्वामी कल्याण राय महाराज ने आशीर्वचन के बाद पात्रों को पुरस्कृत किया। इस मौके पर इस मौके पर वल्लभ बाबा, घनश्याम, आभा, अंकित पारिख, बीडी गुजराती, पं. अशोक शर्मा, अशोक बल्लभदास, द्वारका, रमेश जोशी, संजय नागर, पं. विकास दीक्षित, पं. रमेश उपमन्यु शास्त्री, पं. मदन मोहन शास्त्री आदि रहे।
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