कोरोना संक्रमण की वजह से विद्यालयों में ठप ऑफलाइन कक्षाएं फिर से शुरू हो चुकी हैं। महामारी की वजह से दो साल से बच्चों की पढ़ाई लड़खड़ा कर बेपटरी हो गई थी। पहली से लेकर तीसरी लहर तक कई बार स्कूल बंद हुए, लेकिन बच्चों के टीकाकरण के बाद से अभिभावकों में भी उनकी सुरक्षा को लेकर विश्वास बढ़ा है।
वह बेहिचक बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। वहीं, स्कूल भी अपनी तरफ से पूरी एहतियात बरत रहे हैं। परिषदीय से लेकर माध्यमिक विद्यालयों में अभी भी कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। स्कूल आने पर बच्चों को मास्क लगाने, साफ-सफाई के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
जिले में करीब दो साल बाद शिक्षा व्यवस्था पटरी पर लौटी है। परिषदीय स्कूलों के साथ यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के स्कूल 100 फीसदी क्षमता के साथ चल रहे हैं। स्कूलों में लंबे समय बाद रौनक नजर आने लगी है।
मास्क अभी भी अनिवार्य
प्रशासन ने कोरोना को लेकर जारी सभी प्रतिबंध हटा दिए हैं। शैक्षिक संस्थाएं पूरी क्षमता के साथ खुल चुकी हैं। प्राथमिक विद्यालय भिटारी के प्रधानाध्यापक रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि स्कूलों में मास्क और सामाजिक दूरी के नियम का अभी भी सख्ती से पालन कराया जा रहा है।
निवेदिता शिक्षण सदन की प्रधानाचार्य आनंद प्रभा ने बताया कि स्कूल में किसी भी छात्र को बिना मास्क प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। साथ ही कक्षाओं में कोविड प्रोटोकॉल के तहत अलग-अलग बैठाया जा रहा है। सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. विश्वनाथ दुबे ने बताया कि बच्चों को कोई भी परेशानी होने पर स्वास्थ्य विभाग के जरूरी नंबरों के बारे में भी बताया गया है।
भौतिक पठन-पाठन से खुश हैं बच्चे
कोरोना के कारण दो साल से स्कूल बंद होने से बच्चों को सबसे ज्यादा तनाव और नुकसान झेलना पड़ा था। टीकाकरण होने के बाद बच्चे स्कूल आने में खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
कंपोजिट विद्यालय महमूरगंज की प्रधानाध्यापक प्रीति त्रिवेदी ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों को विज्ञान और गणित के कई विषयों को समझाने में समस्या होती थी। अब ब्लैक बोर्ड के सामने बैठकर बच्चे सरलता से विषयों को समझ पा रहे हैं।
हर दिन सीखें अभियान से दी जा रही शिक्षा
कोरोना के कारण बच्चों को लंबे समय से स्कूलों से दूर रहना पड़ा था। जिसके कारण कई बच्चे पढ़ाई में रुचि नहीं ले रहे हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह ने बताया कि बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए हर दिन सीखें अभियान चलाया जा रहा है।
बच्चों को अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से रोचक जानकारी दी जा रही है। खेल-खेल में उन्हें गिनती, पहाड़ा, प्राकृतिक रंग बनाना सिखा रहे हैं।
सभी विद्यालयों को कोरोना प्रोटोकॉल के साथ पढ़ाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही स्कूलों में कक्षाओं की दीवारों पर मास्क पहनने और सामाजिक दूरी के जागरूकता वाले संदेश भी लगाए गए हैं। - विनोद कुमार राय, जिला विद्यालय निरीक्षक
कोविड हेल्प डेस्क बनाया गया है। स्कूल में प्रवेश के पहले बच्चों के शरीर के तापमान की जांच की जाती है। इसके बाद ही उन्हें कक्षाओं में प्रवेश मिलता है। - दीपक मधोक, अध्यक्ष पूर्वांचल स्कूल एसोसिएशन
ऑनलाइन पढ़ाई में नेटवर्क की दिक्कत होने से कई बार पाठ्य समझ नहीं आते थे। शिक्षक सामने होते हैं तो सब चीज अच्छे से समझ आती हैं। घर में शिक्षकों और दोस्तों को मिस भी करती थी। - तान्या, छात्रा, कक्षा ग्यारह
घर में पढ़ाई करने पर स्कूल वाली फीलिंग नहीं आती है, ऑफलाइन पढ़ाई ज्यादा बेहतर है। बहुत दिनों पर अब स्कूलों में पहले जैसी पढ़ाई का माहौल बना है, अब ब्लैकबोर्ड के सामने बैठकर अच्छा महसूस कर रहा हूं। - शिवांश, छात्र, कक्षा नौ