इसके बाद टीम दोपहर साढ़े तीन बजे उभ्भा गांव पहुंची। वहां प्राथमिक स्कूल में टीम अगुवा रेणुका कुमार के अलावा प्रमुख सचिव(श्रम) सुरेश चंद्रा और विंध्याचल मंडल के कमिश्नर एके सिंह ने मृतक-घायलों के परिवारीजनों से मुलाकात की और उनसे बातचीत कर जरूरी जानकारी जुटाई। मूर्तिया के पूर्व प्रधान बहादुर सिंह गोंड़, जगन्नाथ पाल, मृतक राजेश की पत्नी प्रतिभा, मृतक रामसुंदर की पत्नी अतवरिया आदि ने जांच दल को घटना की कहानी और आपबीती बताई।
जांच दल द्वारा पूछे गए प्रश्नों का जबाब भी दिया। घटना के चश्मदीद रामराज गोंड़ के गांव में ना होने के कारण जांच टीम ने उससे मोबाइल के जरिए वार्ता की। पीड़ितों का कहना था कि 17 जुलाई को दिन में 11 बजे प्रधान यज्ञदत्त सिंह के नेतृत्व में करीब 200 लोग 30-35 ट्रैक्टरों से पहुंचे और खेत की जुताई करने लगे। उनके पास कई असलहे थे। विरोध करने पर दोनों पक्षों में लाठी डंडे चले। इसके बाद प्रधान पक्ष के लोगों ने असलहों से फायरिंग शुरू कर दी।
पीड़ितों का कहना था कि उन लोगों ने सीओ, एसपी, कोतवाल, सौ नंबर डायल कर पुलिस को इसकी सूचना भी दी। एक सिपाही से घटना घटित होने के पहले बात भी हुई थी। बावजूद घटना के आधे घंटे बाद ही सौ नंबर पुलिस पहुंची। पीड़ितों ने बताया कि संबंधित जमीन को लेकर 67 लोग मुकदमा लड़ रहे हैं। मृतक-घायल के परिवारीजनों ने लगातार उत्पीड़न का भी आरोप लगाया।
पीड़ितों ने कहा कि प्रधान यज्ञदत्त के प्रभाव में आकर प्रशासन ने उन पर कई बार 107/16 की कार्रवाई की। गुंडा एक्ट लगाकर जिला बदर किया। चार महीने पहले भी फसल काटने को लेकर विवाद हुआ था, जिस पर तत्कालीन डीएम ने कहा था कि जो बोया है वहीं फसल काटेगा।
पीड़ितों का कहना था कि प्रधान और उसके रिश्तेदारों द्वारा जमीन रजिस्ट्री लिए जाने के बाद इसकी जानकारी हुई। इस पर जांच दल ने डीएम अंकित कुमार अग्रवाल को निर्देश दिया कि वह इस संबंध में एआरओ से पूछताछ करने के साथ रिपोर्ट तलब करें।
टीम ने तहसीलदार और लेखपाल को बुलाकर गांव का जमीन संबंधी नक्सा देखा और सोसायटी के नाम कितनी जमीन है? उसकी नवैयत क्या है? उसकी मौजूदा स्थिति क्या है? किस तरह का विवाद है? आदि की जानकारी ली। इस मौके पर एसडीएम केएस मिश्रा, बीएसए गोरखनाथ पटेल,तहसीलदार सुरेश शुक्ला, प्रभारी निरीक्षक सीपी पांडेय आदि मौजूद रहे।
सचिव के सामने हांफते रहे अधिकारी :
कलेक्ट्रेट में अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार ने समिति से जुड़े दस्तावेजों की गहराई से जांच की। सूत्रों की मानें तो सचिव को कई दस्तावेज नहीं मिले। इस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी दर्ज करते हुए कहा कि मुझे सभी दस्तावेज हर हाल में चाहिए। जिसके पटल से दस्तावेज गायब हुए होंगे उनके ऊपर कार्रवाई होगी। सचिव के कड़े रूख को देख कई अधिकारी हांफते नजर आए। हालांकि मीडिया कर्मियों को अंदर जाने से रोक दिया गया था।
उभ्भा हत्याकांड मामले में अभी तक 34 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। इन गिरफ्तार लोगों में 16 नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गई है, जबकि अज्ञात अभियुक्तों में से 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। नामजद लोगों में ग्राम प्रधान यज्ञदत्त सिंह, गणेश, विमलेश, धर्मेंद्र, नीरज राय, कोमल सिंह, अशर्फी, प्रमोद, ओमप्रकाश, निधिदत्त व देवदत्त को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
इसके अलावा अज्ञात लोगों में शीतला प्रसाद, प्रदीप, चंदन सिंह, सतीश, सुरेश कुमार, आशुतोष, राजीव कुमार, दिनेश, हनुमान, अशोक कुमार, गोलू, धर्मेंद्र कुमार, विपुल कुमार, विजय कुमार, रामकेश, वागेंद्र, सुरेंद्र व लुल्लर को अभी तक गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से वागेंद्र मिर्जापुर जिला के मड़िहान थाना क्षेत्र के लेदुकी गांव का निवासी है, जबकि अन्य 33 गिरफ्तार लोग मूर्तिया, सपही गांव के निवासी हैं।