चंदौली के एआरटीओ आरएस यादव की संपत्ति का खुलासा होना कोई बड़ी बात नहीं है। प्रदेश के ज्यादातर एआरटीओ करोड़पति है। उनके पास लखनऊ में फ्लैट से लेकर जमीनें तक हैं। जांच कराई जाए तो प्रदेश के 100 से अधिक एआरटीओ में हर एक के पास करोड़ों की प्रापर्टी सामने आएगी।
इसका प्रमुख कारण यह है कि लगभग हर जिले में 80 लाख से एक करोड़ की वसूली इंट्री के नाम पर होती थी। योगी सरकार में यह अवैध वसूली थम गई है। लेकिन आरएस यादव चंदौली में वसूली करा रहा था। इसकी रिपोर्ट परिवहन विभाग के अधिकारियों ने मंत्री को भी भेजी थी। जिस पर मंत्री ने रात्रि चेकिंग कराने का निर्देश जोनल आरटीओ को दिया था।
योगी सरकार बनने से पहले ओवर लोड वाहन हर जिले से 1500 से 2000 की संख्या में गुजरते थे। इन वाहनों की इंट्री टीएस मान, एनएस, डीएमआर, एएच, संभल गोल्डेन आदि नामों से होती थी। एक वाहन से 1200 से 1800 की वसूली होती थी। जो सीधे एआरटीओ के पास जाती थी।
शायद ही प्रदेश का कोई ऐसा जिला होगा जहां यह खेल न होता हो। जौनपुर में इस खेल का खुलासा अमर उजाला ने अभियान चलाकर किया था। जिसके बाद तत्कालीन डीएम भानुचंद्र गोस्वामी ने 25 से अधिक ओवर लोड गाड़ियों को एसडीएम से बंद करवाया था।
स्थिति यह है कि जौनपुर में ऐसी गाड़ियों के बंद करने का प्रयास तत्कालीन पीटीओ ने किया तो उनका ट्रांसफर करा दिया गया। वसूली का पूरा गिरोह है और इस गिरोह में कुछ ट्रांसपोर्टर भी दलाली करते हैं।
ऐसे ट्रांसपोर्टर वसूली का विरोध करने वाले अधिकारियों की शिकायत करते हैं। चंदौली का अर्जुन वसूली का सरगना था। जो चंदौली, वाराणसी, जौनपुर, मिर्जापुर, भदोही, गाजीपुर जिले के एआरटीओ के लिए इंट्री करता था।