उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शुरू की गई 70 साल पुरानी रवायत को रमजान के पहले बुधवार को भी निभाया गया। हर साल की तरह रमजान के पहले बुधवार को उस्ताद के आवास पर रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया।
इफ्तार संग नमाज और मजलिस में रोजेदारों ने शिरकत कर मिल्लत का पैगाम दिया। इस बार का रोजा इफ्तार और खास तब हो गया जब उस्ताद के परपोते और परपोती की रोजा खुशाही हुई।
दस साल के राशिम हसन और तंजीला फातमा को मौलाना ने अपने हाथों से खजूर खिलाकर रोजा खुलवाया। उस्ताद के आवास पर आयोजित रोजा इफ्तार से पहले मौलाना सैयद मोहम्मद अकील हुसैनी ने नमाज अदा कराई।
नमाज के बाद लोगों ने खजूर और शरबत से रोजा खोला। इफ्तार के बाद हुई मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना अकील हुसैनी ने कहा कि उस्ताद लाजवाब फनकार के साथ लाजवाब इंसान भी थे। मजलिस के बाद हकीम मोहम्मद काजिम का नौहा पढ़ा गया।
रोजेदारों का इस्तकबाल काजिम हुसैन और मोहम्मद सिब्तैन ने किया। इफ्तार में अब्बास मुर्तजा शमसी, मुनाजिर हुसैन, काबे अली, कर्रार जैदी, जौहर हुसैन, नासिर अब्बास, अकबर हुसैन, रजा नन्हे, रियाज जाफर, हाजी हसन आदि मौजूद रहे।