दरगाह-ए-फातमान स्थित शहनाई के बादशाह उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के मकबरे पर दुआख्वानी, फातिहाख्वानी और हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। इसके पहले कथक की प्रस्तुति से उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
शहनाई के बादशाह उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की पुण्यतिथि पर गुरुवार को दरगाह-ए-फातमान स्थित उनके मकबरे पर अकीदत पेश करने आम-ओ-खास पहुंचेंगे। उनके मकबरे पर दुआख्वानी और फातिहाख्वानी के साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ भी होगा। शहनाई पर उस्ताद के चर्चित नौहे भी पेश किए जाएंगे। बुधवार को उनकी पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर संगीत संध्या का आयोजन किया गया।
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छावनी परिषद और दीपिका कल्चरल सोसाइटी ऑफ इंडिया की ओर से छावनी स्थित नेहरू पार्क में वरुणा संध्या भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां समर्पित रही। उस्ताद के पौत्र असद अली एवं मयस्सर अली एवं प्रपौत्र जेन अली ने राग यमन तीनताल में शहनाई पर गंगा द्वारे बधाइयां बाजे...आदि धुनों को पेशकर सभी को मुरीद बना लिया। दुकड़ पर मकई अली ने संगत की।
मांडवी सिंह ने कथक से शिव वंदना की। अंत में रामभजन पेशकर भावविभोर कर दिया। इस दौरान मूर्तिकार बद्री प्रसाद प्रजापति ने उस्ताद की सजीव मूर्ति बनाकर सभी को प्रभावित किया। संस्था के अध्यक्ष अजय गुप्ता और विकास जायसवाल ने कलाकारों को सम्मानित किया। संचालन तनु कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन छावनी परिषद के अभियंता सचिन कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस मौके पर शहनाई वादक दुर्गा प्रसन्ना रमेश कुमार, काशीराम कुशवाहा आदि रहे।