वाराणसी। प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने का ठेका लेने वाला गिरोह जौनपुर का है। गिरोह में साल्वर, पेपर आउट कराने वाला और फोटो मिक्सिंग कर फर्जी आधार कार्ड, फर्जी एडमिट कार्ड व अन्य आईडी तैयार करने वाले सदस्य शामिल हैं। खुद गिरोह का सरगना अशोक पाल प्रयागराज में कई नवयुवकों को कोचिंग देता है। एसटीएफ वाराणसी इकाई की पूछताछ में गिरोह के सरगना अशोक कुमार पाल ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल के जरिए पास कराने का ठेका 12 से 15 लाख में लिया जाता है। अशोक के अनुसार गिरोह में मेरे साथी जौनपुर के रामपुर थाना अंतर्गत गंधौना निवासी डॉ. बृजेश पाल और जौनपुर के बरसठी थाना का मानिकपुर गांव निवासी संदीप विश्वकर्मा है। अभ्यर्थियों व साल्वर के फोटो मिक्सिंग करने का काम जौनपुर के मछलीशहर के तरसांव गांव निवासी रमेश करता है। इस कार्य में सभी का हिस्सा बंटा रहता है। एसटीएफ की पूछताछ में सरगना अशोक ने बताया कि डॉ. बृजेश पाल प्रयागराज में पतंजलि क्लीनिक सेंटर में चिकित्सक है।
दो अभ्यर्थियों से 12 लाख में तय हुआ था सौदा
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि परीक्षा पास कराने के लिए गिरोह के सरगना अशोक ने अपने साथी डॉ. बृजेश पाल से बात करके सुनील कुमार पाल से 12 लाख रुपये में सौदा तय किया था। एडवांस में 40 हजार रुपये ले लिया गया था। सुनील पाल व डॉ. बृजेश पाल शुक्रवार को ही कैंट स्टेशन स्थित एक होटल में ठहरे थे। इस दौरान जौनपुर के एक और अभ्यर्थी आशीष कुमार पाल से 12 लाख रुपये में डॉ. बृजेश पाल से परीक्षा पास कराने पर बात पक्की हुई थी और आशीष ने भी एडवांस में 40 हजार रुपये बृजेश पाल के खाते में डाला था। एसटीएफ के अनुसार डॉ. बृजेश पाल सेंटर से भाग निकला है।
नीट परीक्षा की तैयारी छोड़कर बना साल्वर
एसटीएफ की गिरफ्तार में आए साल्वर रविंद्र चौरसिया ने पूछताछ में बताया कि कानपुर में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रहा था। शुक्रवार सुबह में डॉ. बृजेश पाल ने फोन पर कहा कि कानपुर से बनारस चले आओ। कानपुर से शनिवार सुबह छह बजे कैंट रोडवेज पहुंचा और यहां से डॉ. बृजेश पाल के साथ ऑटो में सवार होकर परीक्षा केंद्र पर गया। बृजेश पाल ने ही एडमिट कार्ड और आधार कार्ड उपलब्ध कराया। परीक्षा के एवज में पंद्रह हजार रुपये मिलने वाले थे।