लोहता के राजेश कुमार यादव का कहना है कि पहले तो कोरोना संक्रमण की वजह से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बाधित हुई जब तैयारी हो गई तो अब परीक्षा निरस्त होने से भविष्य अधर में लटक जाएगा।
जौनपुर के सतीश सिंह ने कहा कि हर बार परीक्षा से पहले पूरी तैयारी चुस्त, दुरूस्त होने का दावा किया जाता है। अब फिर से परीक्षा देना होगा। शासन-प्रशासन की नाकामी का परिचायक इससे बड़ा और क्या हो सकता है।
चित्रसेनपुर के चंद्रशेखर ने बताया कि परीक्षा को बीच में निरस्त करना सरकार की खामी हैं। इसका परिणाम परीक्षार्थियों को भुगतना पड़ेगा। तमाम दावों के बाद भी इस तरह की अनियमितता ठीक नहीं है।