रुक-रुक कर कई घंटे तक होती रही बारिश।
- फोटो : अमर उजाला
मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार ये मूसलाधार बारिश थी, जो कि काशी में जून महीने में चार साल बाद देखी गई है। वहीं 17 वर्ष में तीसरी बार जून के किसी एक दिन में इतनी जोरदार बारिश हुई।
बारिश के बाद कई जगह लगा पानी।
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इससे पहले बनारस में 18 जून, 2021 को 92.6 मिमी और 29 जून, 2015 को 103.8 मिमी बारिश हुई थी।
युवाओं ने उठाया लुत्फ।
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सोमवार की बारिश ने तापमान भी 5-6 डिग्री तक नीचे लुढ़का दिया। शाम 5 बजे तक पारा 32 डिग्री था, जो कि रात आठ बजे तक 27 डिग्री से भी नीचे चला गया। हवा भी 15 से 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बही।
कई स्थानों पर घुटने पर लगा पानी।
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वहीं बारिश से पहले सोमवार को बनारस यूपी का दूसरा सबसे गर्म शहर भी बना हुआ था। यहां का अधिकतम पारा 35.9 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम पारा 27.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अगले सात दिनों तक जोरदार बारिश का यलो अलर्ट है।
गोदाैलिया में लगा बारिश का पानी।
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यूपी आचंलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह के मुताबिक बंगाल से उत्तर प्रदेश तक मानसून द्रोणी बना है। मानसूनी प्रवाह तेजी आई है और धरती से 3.1 किमी ऊंचाई पर बादल बंगाल से होते हुए झारखंड और यूपी-बिहार की ओर आ रहा है।
बारिश का पानी लग जाने से लोगों को हुई परेशानी।
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आगे कई दिन तक ऐसे ही भारी बारिश होने की उम्मीद है। बनारस में जून महीने के 29 दिनों में सामान्य स्तर 88 मिमी से दो प्रतिशत कम 86.2 मिमी बारिश हुई।
ऑफिस में घुसा बारिश का पानी।
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60 मिमी से ज्यादा बारिश में होती है बादल फटने की घटना
डॉ. अतुल सिंह ने बताया कि जब एक घंटे में 15 मिमी से ज्यादा हो तो इसे बहुत भारी बारिश कहेंगे। जब 30 मिमी से ज्यादा हो तो मूसलाधार बारिश और जब 60 मिमी से ऊपर हो तो इसे बादल का फटना कहते हैं।
दुकान में भी घुसा पानी।
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बनारस की ये सड़कें रहीं जाम से त्रस्त
मंडुआडीह से लेकर आकाशवाणी, बरेका से लेकर बनारस स्टेशन, बीएचयू से लेकर लंका चौराहा, अंधरापुल से नदेसर, कैंट, लहरतारा, पांडेयपुर, गौदोलिया, लक्सा, मैदागिन, नई सड़क और सामनेघाट मार्ग जाम से कराहता रहा।
गोदाैलिया में लगा बारिश का पानी।
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इस दौरान कई मरीज एंबुलेंस में ही फंसे रहे और ऑफिस से लौटने वाले लोग भी जाम से बिलबिला उठे। बारिश के चलते सड़कों पर गड्ढों में पानी भर गया और लोगों को आने जाने में बड़ी फजीहत हो गई। दुश्वारियां ऐसी रहीं कि काफी लोग अपने वाहनों को छोड़ साइड में ही खड़े हो गए।
सीवर हो गए चोक।
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श्रद्धालुओं को मंदिर और घाट की गंगा आरती में दुश्वारी
काशी की गलियों में बारिश के बाद चलना-फिरना दूभर हो गया। विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव के दर्शन को जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही गंगा आरती देखने वालों को दिक्कत हुई।
पेट्रोल पंप पर लगा बारिश का पानी।
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घाटों पर पैर फिसलते रहे और कीचड़ से सनी गलियों में देसी-विदेशी पर्यटक भी कदम दबाकर आगे बढ़ते रहे।
बीएचयू गेट के पास लगा बारिश का पानी।
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रविंद्रपुरी का भी बुरा हाल
रविंद्रपुरी कल्याण समिति के अध्यक्ष अनुज डीडवानिया ने कहा कि बारिश का पानी कई घरों में घुस गया। यहां सड़क को ऊंचा किया गया है। सीवर लाइन को जोड़ा नहीं गया है। चारों तरफ सड़कें खोदी गई और बिजली के तार खुले हैं। इससे दुर्घटना का खतरा बना है। उधर पोल और पिलर के लिए खोद कर छोड़े गए गड्ढे बहुत खतरनाक हैं।
बारिश के बाद जाम की आफत।
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मूसलाधार बारिश से फैक्टरी की बाउंड्री धराशायी
मूसलाधार बारिश से रामनगर औद्योगिक क्षेत्र फेस एक में मैट्रिक्स रोलर मिल प्राइवेट लिमिटेड की 80 फीट लंबी व 24 फीट उंची बाउंड्री गिर पड़ी। हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ। बाउंड्री गिरने से बारिश का पानी फैक्टरी में भर गया। बिजली उपकरण सहित अन्य मशीनें बंद हो गई।
जाम में फंसे लोग।
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लगभग 12200 बोरी चोकर सहित अन्य सामान पूरी तरह खराब हो गया। कंपनी के जनरल मैनेजर रामाशीष पटेल ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र में जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण अक्सर बारिश में फैक्टरी मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।