निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने आर-पार की जंग शुरू कर दी है। प्रदेश सरकार के फैसले से नाराज बिजली कर्मियों ने मंगलवार को प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार किया। वाराणसी के भिखारीपुर स्थित एमडी कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की। कार्य बहिष्कार से कई उपकेंद्रों पर सन्नाटा पसर गया।
इससे तमाम उपभोक्ताओं को परेशानी हुई। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने एमडी कार्यालय के बाहर हुई सभा में दो टूक चेतावनी दी कि सरकार ने बिजली व्यवस्था निजी हाथों में देने का अपना फैसला वापस नहीं लिया तो इसके नतीजे गंभीर होंगे।
समिति ने तय किया कि बुधवार से अनिश्चितकालीन नियमानुसार कार्य आंदोलन होगा। इसके तहत सुबह 10 से शाम 5 बजे तक ही बिजली कर्मी काम करेंगे। अवकाश के दिन कोई कर्मचारी काम नहीं करेगा। इस बीच, 28 मार्च से आठ अप्रैल तक प्रतिदिन दोपहर दो से शाम 5 बजे तक एमडी कार्यालय पर विरोध सभा भी होगी।
नौ अप्रैल से 72 घंटे लगातार पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। यदि बिजली कर्मियों की आवाज दबाने की कोशिश हुई तो बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। जरूरत हुई तो जेल भरो आंदोलन शुरू कर सामूहिक गिरफ्तारी देंगे।
कांग्रेस सहित कई संगठनों का समर्थन
एमडी कार्यालय पहुंचे कांग्रेस के पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्र, पूर्व विधायक अजय राय, प्रजानाथ शर्मा के अलावा गंगोत्री सेवा समिति, विद्युत पेंशन परिषद, दशाश्वमेध व्यापार मंडल, जनकल्याण परिषद, श्रमिक विकास संगठन, आम आदमी पार्टी, मां गंगा निषादराज, बंगाली टोला व्यापार मंडल, चंद्रशेखर फाउंडेशन आदि ने बिजली कर्मियों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। सरकार के निजीकरण के फैसले का विरोध करते हुए बिजली कर्मियों के समर्थन में आवाज उठाई।