अपने बेपरवाह कामकाज के तरीके से पुलिस खुद ही अपनी खिल्ली उड़वाती है। ताजातरीन मामला वाराणसी के लोहता थाने से जुड़ा है जहां शुक्रवार को एक युवक के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66 ए के तहत मुकदमा दर्ज किया और बाकायदा विज्ञप्ति बनवाकर प्रेसवार्ता आयोजित की गई।
बता दें कि आईटी एक्ट की धारा 66 एक को सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2015 में ही रद्द कर दिया है। ऐसे में लोहता पुलिस की करतूत जब आला अधिकारियों की जानकारी में आई तो लोहता थानाध्यक्ष को फटकार लगाकर दर्ज मुकदमे की धाराओं में संशोधन किया गया और तब जाकर आरोपी को कोर्ट भेजा गया।
कानून के बारे में पुलिस की आधी अधूरी जानकारी महकमे में चर्चा का विषय बनी रही। बड़ी बाजार निवासी अनुज कुमार गुप्ता के खिलाफ वाट्सएप पर धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप में गुरुवार को लोहता थाने में आईपीसी की धारा 295 ए और सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधित) अधिनियम 2008 की धारा 66 ए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
यह मुकदमा लोहता थानाध्यक्ष जयराम शुक्ल की तहरीर पर लिखा गया और शुक्रवार को गिरफ्त में आए अनुज को मीडिया के सामने प्रस्तुत कर प्रेसवार्ता की गई। आईटी एक्ट की धारा 66 ए सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बावजूद क्यों उसके तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
इस सवाल पर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) आशीष तिवारी ने बताया कि लोहता थाने के थानाध्यक्ष और मुंशियों से त्रुटि हो गई थी। समय रहते धाराओं में संशोधन कर कोर्ट के सामने मामले को प्रस्तुत किया गया था।