उत्तर प्रदेश की कमान संभालने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी मुलाजिमों को साफ संदेश दिया था कि कार्य संस्कृति बदल लें और कामकाज के ढर्रे में सुधार लाएं। पिछली सरकारों के समय में जो मनमानी चल रही थी, वह अब नहीं चलने पाएगी।
मगर, मुख्यमंत्री के निर्देश वाराणसी जिले में नौकरशाही की भेंट चढ़ जाते हैं और हकीकत के धरातल पर उनका क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। खासतौर से बात पुलिस महकमे की जाए तो जो भी बड़े मामले जिले के थानों में दर्ज किए गए हैं, लंबे समय बाद भी उनमें कार्रवाई नहीं हो पाई।
इन बड़े मामलों में कार्रवाई के संबंध में पूछे जाने पर पुलिस की ओर से एक ही जवाब मिलता है, विवेचना प्रचलन में है। पुलिस की इस बेपरवाह कार्यशैली की वजह से जहां एक ओर पीड़ितों का हित प्रभावित होता है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के निर्देश भी सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं।
आगे की स्लाइड्स में देखें वो पांच बड़े मामले जहां मुकदमा तो दर्ज हो गया लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हुआ।
15 मौतों का कसूरवार चिह्नित नहीं कर सके
15 मई को कैंट रेलवे स्टेशन के समीप निर्माणाधीन चौकाघाट फ्लाईओवर की दो बीम सड़क पर गिर पड़ी और उसके नीचे दबकर 15 लोगों की मौत हो गई। घटना को लेकर सिगरा थाने में पुलिस की ओर से आपराधिक मानव वध सहित अन्य आरोपों में सेतु निगम के अज्ञात अधिकारियों और ठेकेदारों आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मगर, 26 दिन बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी तो दूर कसूरवारों को पुलिस चिह्नित तक नहीं कर सकी है।
शहर में थे PM मोदी, सुलग रहा था बीएचयू
बीते साल सितंबर महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शहर में मौजूद थे। छेड़खानी के मुद्दे को लेकर बीएचयू परिसर में जमकर बवाल हुआ। हालात कुछ इस कदर बिगड़े कि दुर्गाकुंड गए प्रधानमंत्री का रूट आननफानन में पुलिस को बदलना पड़ा था। मगर, इस मामले के दोषियों के खिलाफ अब तक पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं की जा सकी है। पूछने पर जवाब मिलता है कि विवेचना चल रही है।
बीएचयू अस्पताल में मौतों की गुत्थी नहीं सुलझी
बीएचयू अस्पताल
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में भर्ती मरीजों की मौत आक्सीजन सिलेंडर संबंधी गड़बड़ियों के कारण बीते साल जून महीने में हो गई थी। घटना को लेकर लंका थाने में गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। दर्ज मुकदमे को लेकर क्या कार्रवाई हुई, यह सवाल पूछने पर जिम्मेदार इधर-उधर की टालमटोल वाली बातें करने लगते हैं।
दो टूक हिदायत के बाद भी वसूली करने वाले नहीं आए जद में
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 मई को मंडलायुक्त सभागार में कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान कहा था कि चौराहों पर पुलिस द्वारा की जा रही अवैध वसूली को बंद कराया जाए। अधिकारी औचक निरीक्षण कर अवैध वसूली करने वालों को पकड़ें और कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री के निर्देश के 22 दिन बाद भी अवैध वसूली के आरोप में जिले में एक भी पुलिसकर्मी पकड़ा जाना तो दूर चिह्नित भी नहीं किया जा सका।
भविष्य से खिलवाड़, 43 दिन बाद भी कार्रवाई कुछ नहीं
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रेडियो जॉकी और ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में कैरियर बनाने का सपना दिखाकर स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग के संचालक साईं शेखर तिवारी सहित अन्य ने छात्र-छात्राओं से 20 लाख रुपये ऐंठ लिया। सिगरा थाने में स्कूल संचालकोें में से चार के खिलाफ 28 अप्रैल को नामजद मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस तफ्तीश करती रही और संचालक स्कूल बंद कर शहर से भाग गए। तक से अब तक 20 छात्र-छात्राएं न्याय की गुहार लगा रहे हैं।